मोबाइल में वायरस या संदिग्ध ऐप दिखे तो घबराएं नहीं, तुरंत अपनाएं साइबर सुरक्षा उपाय

हिमाचल प्रदेश पुलिस की एडवाइजरी—संदिग्ध लिंक व ऐप से रहें दूर, बैंकिंग पासवर्ड और ओटीपी कभी साझा न करें
शिमला, 5 अक्टूबर: हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नागरिकों को मोबाइल फोन में मैलवेयर, वायरस, संदिग्ध ऐप अथवा अनधिकृत गतिविधि की आशंका होने पर सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस ने कहा है कि यदि मोबाइल फोन अचानक बहुत धीमा हो जाए, ऐप सामान्य तरीके से काम न करें, संपर्क (Contacts) गायब दिखाई दें अथवा अनजान ऐप और पॉप-अप नजर आने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण मैलवेयर, दुर्भावनापूर्ण ऐप, अनधिकृत एक्सेस अथवा अकाउंट सिंक्रोनाइजेशन में समस्या के कारण हो सकते हैं।
नरवीर सिंह राठौर, साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिकारी, के अनुसार मोबाइल फोन में अचानक असामान्य व्यवहार दिखाई देना हमेशा वायरस होने का प्रमाण नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है। मोबाइल का अचानक धीमा होना, अनजान ऐप का दिखाई देना, बार-बार पॉप-अप आना, बैटरी या डेटा का असामान्य रूप से अधिक उपयोग होना अथवा अकाउंट में अनधिकृत गतिविधि दिखाई देना संभावित साइबर सुरक्षा जोखिम के संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे पहला कदम घबराना नहीं, बल्कि मोबाइल को सुरक्षित करना होना चाहिए। संदिग्ध गतिविधि का संदेह होने पर मोबाइल को Airplane Mode पर डालकर Wi-Fi और Bluetooth बंद कर देना चाहिए। इससे संभावित अनधिकृत नेटवर्क कनेक्शन को तत्काल सीमित करने में मदद मिल सकती है।
राठौर ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई APK, स्क्रीन-शेयरिंग या Remote-Access ऐप इंस्टॉल न करें। साइबर अपराधी अक्सर तकनीकी सहायता, बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी या अन्य विश्वसनीय संस्था का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं और मोबाइल पर नियंत्रण प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह समझना जरूरी है कि OTP, UPI PIN, ATM PIN, Password या बैंकिंग Credentials किसी भी परिस्थिति में साझा नहीं किए जाने चाहिए। वास्तविक बैंक या अधिकृत एजेंसी भी सामान्यतः ऐसी गोपनीय जानकारी फोन पर मांगकर सत्यापन नहीं करती।
साइबर विशेषज्ञ के अनुसार यदि Contacts अथवा अन्य डेटा अचानक दिखाई नहीं दे रहा है, तो तुरंत यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि डेटा चोरी या डिलीट हो गया है। कई मामलों में Google Account अथवा Cloud Synchronisation में समस्या के कारण भी डेटा अस्थायी रूप से दिखाई नहीं देता। इसलिए पहले Synchronisation Settings की जांच करनी चाहिए।
उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि मोबाइल में संदिग्ध ऐप मिलने पर उसे हटाने से पहले, विशेषकर यदि मामला संभावित साइबर अपराध या वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा हो, महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखें। संदिग्ध संदेश, फोन नंबर, स्क्रीनशॉट, transaction details, ऐप का नाम और अन्य डिजिटल जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
राठौर ने कहा कि यदि बैंकिंग या UPI से कोई अनधिकृत लेन-देन हो चुका है तो समय सबसे महत्वपूर्ण है। नागरिकों को तत्काल अपने बैंक से संपर्क करने के साथ साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देनी चाहिए। जितनी जल्दी घटना की सूचना दी जाएगी, उतनी ही जल्दी संबंधित वित्तीय लेन-देन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी विषय न समझें। सतर्कता, सत्यापन और समय पर कार्रवाई ही साइबर अपराध से बचाव की पहली सुरक्षा-दीवार है।
विशेषज्ञ का सुरक्षा मंत्र
“STOP • CHECK • VERIFY • SECURE”
रुकें • जांचें • सत्यापित करें • सुरक्षित करें
नारवीर सिंह राठौर
साइबर क्राइम विशेषज्ञ
हिमाचल प्रदेश पुलिस




