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अब खर्च नहीं, परिणाम गिनेंगे अधिकारी! शिमला में हुई खास कार्यशाला

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शिमला में ‘‘नोडल अधिकारियों की क्षमता का सुदृढ़ीकरणः आउटकम बजटिंग के माध्यम से नीति को कार्य निष्पादन में रूपांतरित करना’’ विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्यशाला विभागीय नियोजन प्रणालियों को सशक्त बनाने और नीतियों को मापनीय परिणामों में प्रभावी रूप से परिवर्तित करने के उद्देश्य से संचालित क्षमता निर्माण श्रृंखला ‘नीति से परिणीति 2.0’ का हिस्सा थी। कार्यशाला का आयोजन नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन सेल के सहयोग से तथा तकनीकी भागीदार के रूप में  GIZ     इंडिया के सहयोग से किया गया।
योजना विभाग के सलाहकार डॉ. बसु सूद ने कहा कि आउटकम बजटिंग केवल वित्तीय प्रारूपों तक सीमित नहीं है बल्कि यह साक्ष्य-आधारित शासन, रणनीतिक योजना और सार्थक प्रभाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। उन्होंने विभागीय प्राथमिकताओं को ऐसे परिणामों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया जो नागरिकों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार सुनिश्चित करें।
कार्यशाला में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में परिणाम-केंद्रित नियोजन से संबंधित विविध महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। अधिकारियों को परिणाम बजटिंग की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ प्रथाओं, ‘थ्योरी ऑफ चेंज’ की अवधारणा तथा प्रगति को मापने योग्य बनाने हेतु स्मार्ट संकेतकों के विकास की तकनीकों से अवगत कराया गया।
‘राज्यों के लिए नीति आयोग’ विषय पर एक विशेष सत्र में स्टेट सपोर्ट मिशन की भूमिका, राज्य स्तरीय संस्थागत क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहन तथा विभागीय परिणामों को राज्य की विकास प्राथमिकताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त, डाटा-आधारित नियोजन एवं बजटिंग पर केंद्रित चर्चाओं में डाटा की गुणवत्ता, डाटा प्रवाह तथा निगरानी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डाला गया, जिससे साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिल सके। सतत विकास लक्ष्य से संबंधित एक व्यावहारिक सत्र में प्रतिभागियों को यह बताया गया कि विभागीय योजनाएं एवं उनके परिणाम राज्य की वैश्विक विकास प्रतिबद्धताओं में किस प्रकार योगदान देते हैं। राज्य बजट प्रक्रिया का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों को राज्य बजट की संरचना तथा उसके परिणामों, लक्ष्यों और प्रदर्शन मापन से संबंधों की समग्र समझ प्रदान की गई।
कार्यशाला में बताया गया कि आउटकम बजटिंग केवल एक वित्तीय प्रक्रिया नहीं बल्कि हम कितना खर्च करते हैं, से आगे बढ़कर हमारा खर्च क्या उपलब्धि सुनिश्चित करता है, तक की यात्रा है। विभागों को इन सिद्धांतों को अपने नियोजन एवं निगरानी कार्यों में निरंतर अपनाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि सार्वजनिक व्यय को विकास में निवेश के रूप में परिवर्तित किया जा सके और पारदर्शिता, जवाबदेही तथा नागरिकों के भरोसे को सुदृढ़ किया जा सके।

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Deepika Sharma

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