हिमाचल का बी.वॉक मॉडल बना ‘गेम चेंजर’
कौशल विकास भत्ते से बदली हजारों निर्धन छात्रों की तकदीर, अब R&D तक पहुँचे कदम

हिमाचल प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में संचालित बी.वॉक (Bachelor of Vocation) कोर्स आज केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा कौशल विकास भत्ता उन छात्रों के लिए संजीवनी साबित हुआ है, जो 12वीं के बाद आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थे।
आज वही छात्र न केवल सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि उच्च शिक्षा और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
आर्थिक सहारे से आत्मनिर्भरता तक
बी.वॉक एसोसिएशन की हमीरपुर में आयोजित बैठक में सामने आया कि कौशल विकास भत्ते ने हजारों ग्रामीण और निर्धन परिवारों के युवाओं को शिक्षा से जोड़े रखा। कई छात्र, जो पढ़ाई बीच में छोड़ने की कगार पर थे, आज कुशल पेशेवर बनकर अपने परिवारों का सहारा बने हैं और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
नौकरी के साथ रिसर्च की उड़ान
बी.वॉक कोर्स की खासियत केवल प्लेसमेंट तक सीमित नहीं रही।
अब तक 1,794 छात्रों को प्रतिष्ठित कंपनियों में प्लेसमेंट मिली है, वहीं बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। एसोसिएशन का मानना है कि आने वाले समय में ये छात्र नवाचार (Innovation) के माध्यम से नए रोजगार सृजित करेंगे।
आंकड़े बताते हैं सफलता की कहानी
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कुल प्रमाणित छात्र: 3,787
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प्रमाणन दर: 95.6%
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सत्र 2021-24: 58.2% का रिकॉर्ड प्लेसमेंट
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लक्ष्य (2023-26): प्लेसमेंट 80% से अधिक
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि हिमाचल का बी.वॉक मॉडल कौशल आधारित शिक्षा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हमीरपुर बैठक में बनी रणनीति
हमीरपुर में आयोजित बैठक में अध्यक्ष कुश भारद्वाज की अध्यक्षता और महासचिव ललित ठाकुर के संचालन में 12 कॉलेजों के ट्रेनर्स ने भाग लिया।
बैठक में तीन अहम प्रस्ताव सामने आए:
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रिसर्च सेल का गठन — उच्च शिक्षा और शोध की दिशा में छात्रों को मार्गदर्शन।
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वैश्विक मानकों पर प्रशिक्षण — युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप तैयार करना।
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बजट में विशेष प्रावधान — मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया गया कि इस कोर्स को अतिरिक्त शिक्षा बजट से मुख्य शिक्षा बजट में शामिल किया जाए, ताकि आधुनिक लैब और ट्रेनिंग सुविधाएँ विकसित की जा सकें।
मीडिया प्रभारी तरसेम जरयाल और वीरेंद्र जरयाल ने कहा कि ग्रामीण युवाओं के लिए यह कोर्स स्थायी समाधान बन चुका है। पूर्व उपाध्यक्ष गौरव सांख्यान, राजीव चौहान और एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों ने भी माना कि कौशल विकास भत्ता और शिक्षकों की मेहनत ने हिमाचल को कौशल शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में ला खड़ा किया है।




