EXCLUSIVE: यूरोप से हिमालय पहुंचा ‘कॉमन ग्रीनशैंक’, किन्नौर में पहली बार दर्ज हुई मौजूदगी
रकछम-चितकुल वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ प्रवासी पक्षी कैमरे में कैद, किन्नौर के पक्षी संसार में जुड़ा नया अध्याय

किन्नौर, 7 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर की खूबसूरत वादियां एक बार फिर दुर्लभ पक्षी के आगमन की गवाह बनी हैं। रकछम-चितकुल वन्यजीव अभयारण्य के रकछम क्षेत्र में यूरोप और उत्तरी एशिया से आने वाले प्रवासी पक्षी ‘कॉमन ग्रीनशैंक’ (Tringa nebularia) को पहली बार कैमरे में कैद किया गया है। खास बात यह है कि किन्नौर जिले में इस पक्षी का यह पहला पुष्ट रिकॉर्ड है।
रकछम क्षेत्र में नियमित वन्यजीव निगरानी के दौरान ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर ने इस पक्षी को देखा और इसकी तस्वीरें दर्ज कीं। इस दौरान गोपाल नेगी और अल्पना नेगी ने भी पक्षी की पहचान और दस्तावेजीकरण में सहयोग किया। वन्यजीव टीम के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि हर नया पक्षी रिकॉर्ड हिमालयी जैव विविधता की एक नई कहानी सामने लाता है।
हिमांशु चौधरी के अनुसार, किन्नौर घाटी में कॉमन ग्रीनशैंक का यह पहला रिकॉर्ड है। इससे पहले यह पक्षी पड़ोसी स्पीति क्षेत्र में दर्ज किया जा चुका है और वर्ष 2024 में रंगरिक में भी इसकी मौजूदगी रिकॉर्ड हुई थी। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड किन्नौर के एविफॉनल डेटाबेस को समृद्ध करने के साथ-साथ यह संकेत देता है कि जिले की नदियां, जलधाराएं और नमभूमियां प्रवासी जलपक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकती हैं।
हिमाचल प्रदेश की eBird Coordinator डॉ. मलयश्री भट्टाचार्य ने भी पुष्टि की कि किन्नौर जिले से कॉमन ग्रीनशैंक का यह पहला eBird रिकॉर्ड है। इससे यह अवलोकन नागरिक विज्ञान और पक्षी अनुसंधान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
हिमालयी ‘माइग्रेशन कॉरिडोर’ की ओर इशारा
सांगला वाइल्डलाइफ डिवीजन के डीएफओ अशोक नेगी, IFS ने इस रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण बताते हुए रकछम टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की खोजें यह समझने में मदद करती हैं कि ऊंचे हिमालय से होकर गुजरने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए किन्नौर किस तरह एक महत्वपूर्ण माइग्रेशन कॉरिडोर के रूप में काम करता है। उन्होंने सांगला वन्यजीव रेंज और फील्ड स्टाफ के नियमित निगरानी प्रयासों की भी सराहना की।
उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा, IAS ने भी रकछम टीम को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि नए पक्षी रिकॉर्ड रकछम क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रमाण यह भी दर्शाते हैं कि प्रवासी पक्षी इस भू-दृश्य का इस्तेमाल अपनी लंबी प्रवास यात्रा के दौरान करते हैं और क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को और मजबूत करते हैं।
ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष ठाकुर ने कहा कि हर नया पक्षी रिकॉर्ड हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि को समझने में एक नई कड़ी जोड़ता है। वहीं अंकुश ठाकुर ने बताया कि रकछम-चितकुल जैसे क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ‘स्टॉपओवर साइट’ हैं, जहां वे लंबी यात्रा के बीच रुककर आराम करते और आगे की यात्रा के लिए ऊर्जा जुटाते हैं। ऐसे रिकॉर्ड भविष्य में प्रवासी पक्षियों के मार्ग और पश्चिमी हिमालय में उनके आवागमन के अध्ययन में मददगार साबित होंगे।
यूरोप से भारत तक हजारों किलोमीटर का सफर
कॉमन ग्रीनशैंक एक प्रवासी जलपक्षी है, जो उत्तरी यूरोप और एशिया के ठंडे क्षेत्रों में प्रजनन करता है और सर्दियों में भारतीय उपमहाद्वीप की ओर पलायन करता है। यह आमतौर पर नदियों के किनारे, उथले पानी और नमभूमि वाले क्षेत्रों में दिखाई देता है।
रकछम में इसका दिखना केवल एक पक्षी की मौजूदगी भर नहीं, बल्कि हिमालय के पार चलने वाले एक लंबे प्रवासी सफर की जीवंत झलकहै। विशेषज्ञों का मानना है कि किन्नौर में लगातार सामने आ रहे नए पक्षी रिकॉर्ड इस बात के संकेत हैं कि यहां के नदी-नाले और ऊंचाई वाले प्राकृतिक क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
कॉमन ग्रीनशैंक का यह नया रिकॉर्ड किन्नौर के पक्षी संसार में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है और यह संदेश भी देता है कि हिमालय की खामोश वादियां सिर्फ स्थानीय वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर की यात्रा करने वाले प्रवासी पक्षियों का भी भरोसेमंद पड़ाव हैं।




