स्वास्थ्य

मेडिकल शिक्षकों के हितों पर चोट! छुट्टियों से लेकर वेतन तक में बड़ी कटौती

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​चिकित्सा संकाय (मेडिकल फैकल्टी) और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को प्रभावित करने वाले तर्कहीन और एकतरफा फैसलों के निरंतर सिलसिले ने पूरी व्यवस्था के भीतर व्यापक असंतोष और निराशा का माहौल पैदा कर दिया है। हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से बिना किसी परामर्श के कई बड़े फैसले थोप दिए गए हैं, जिससे सेवा शर्तों, शैक्षणिक कामकाज और मनोबल पर गंभीर असर पड़ा है।
​प्रमुख चिंताओं में बिना किसी ठोस आधार के छुट्टियों में कटौती करना, वेतन को ₹54,000 से घटाकर ₹33,000 प्रति माह करना, एनपीए (NPA), 4-9-14 स्केल और पीजी (PG) भत्ते को वापस लेना, विशेष अवकाश को 21 दिनों से घटाकर 8 दिन करना और सीएमई (CME) कॉन्फ्रेंस के टीए/डीए (TA/DA) को बंद करना शामिल है। यहाँ तक कि लोक सेवा आयोग (पब्लिक सर्विस कमीशन) के इंटरव्यू के माध्यम से चुने गए उम्मीदवारों को भी दो साल तक ट्रेनी डॉक्टरों के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
​डीएमई (DME) प्रिंसिपलों के लिए डीपीसी (DPC) न कराना, नए नियुक्त संकाय के लिए कैडर का विलय (कैंडर मर्जर), बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे के केएनएच (KNH) को स्थानांतरित करना और वित्तीय लाभों के बिना समयबद्ध पदनामों (टाइम-बाउंड डेजिग्नेशन) को टुकड़ों में लागू करना जैसे गंभीर प्रशासनिक मुद्दों ने स्थिति को और अधिक बिगाड़ दिया है। इसके अलावा, डेंटल कॉलेज फैकल्टी को पहले से दिए जा चुके पदनामों को कथित तौर पर पिछली तारीख से वापस (रिवर्स) ले लिया गया है।
​हितधारकों के साथ बिना किसी सार्थक बातचीत के लिए जा रहे ऐसे बार-बार के फैसले स्वास्थ्य सेवा शिक्षा प्रणाली के भीतर अनिश्चितता, पक्षपात और अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं। SAMDCOT सरकार से आग्रह करता है कि वह इन फैसलों की तुरंत समीक्षा करे और संस्थागत अखंडता व सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं दोनों की रक्षा के लिए पारदर्शी परामर्श की प्रक्रिया शुरू करे।

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Deepika Sharma

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