असर विशेष: NHM कर्मचारियों पर ये कैसी मेहरबान कैबिनेट, पर ज़मीनी हक़ अब भी अधर में
2,500 कर्मचारी अब भी लाभ से वंचित, न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने को मजबूर हो रहे कर्मचारी

अब NHM के CHO का फैसला भी कर्मचारियों के हित में—फिर भी आदेश लागू न होना बड़ा सवाल*
शिमला।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक के बाद वह अहम अधिसूचना जारी कर दी थी, जिसका बेसब्री से इंतज़ार विभिन्न सोसायटियों में कार्यरत कर्मचारियों को था। अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि सम्बंधित पोस्ट पर नियुक्त कर्मचारियों को तीन वर्ष बाद RKS कॉन्ट्रैक्ट और आठ वर्ष बाद नियमित पै-स्केल का लाभ दिया जाएगा, बशर्ते वे उसी सोसायटी में निरंतर सेवाएँ दे रहे हों।

लेकिन विडंबना देखिए—यह लाभ आज तक NHM में 2,500 से अधिक कर्मचारियों को नहीं मिला।
बल्कि बताया जा रहा है कि आईजीएमसी टांडा अब NHM के तहत कुछ कर्मचारियों को लाभ मिल गया है
कर्मचारियों के धैर्य का बाँध टूट चुका है और इसी अन्याय के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का रुख़ किया था। अब हाई कोर्ट ने भी कई मामलों में कर्मचारियों के पक्ष में मजबूत टिप्पणियाँ की हैं।
NHM के CHO को कोर्ट से बड़ी राहत—पर सरकार का इंतज़ार क्यों?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत 627 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) के मामले में भी हाई कोर्ट ने साफ कहा कि—
जब तक नियमित नियुक्तियाँ नहीं होतीं, तब तक CHO को सेवा से नहीं हटाया जा सकता।
यह फैसला स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के हित में है, लेकिन सवाल यह है कि जब न्यायालय भी संकेत दे चुका है, तो 2,500 अन्य कर्मचारियों को अभी तक कैबिनेट द्वारा स्वीकृत लाभ क्यों नहीं मिला?
कर्मचारियों के संघ के प्रमुख सदस्य अमीन जी का कड़ा बयान
कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ रहा है। संगठन के प्रमुख सदस्य अमीन जी सवाल उठाते हुए कहा:
“कैबिनेट ने हमारी सेवाओं और अधिकारों को मान्यता देते हुए अधिसूचना जारी की, लेकिन विभागीय स्तर पर फ़ाइलें क्यों रोकी जा रही हैं।
2,500 कर्मचारी नियमों के मुताबिक लाभ के पात्र हैं, लेकिन उन्हें अनदेखा किया जा रहा है।
हमसे काम तो नियमित कर्मचारियों की तरह लिया जाता है, लेकिन हक़ देने में सरकार चुप क्यों है?”
अमीन जी ने आगे कहा:
“NHM के CHO मामले में हाई कोर्ट का फैसला भी कर्मचारियों के पक्ष में है। सरकार को अब इस मामले में और देरी नहीं करनी चाहिए।
यदि जल्द लाभ लागू नहीं हुए, तो संगठन राज्य-स्तरीय आंदोलन करने को बाध्य होगा।”
सरकारी अधिसूचना जारी—पर क्रियान्वयन शून्य
2016 की आधिकारिक अधिसूचना (जो दस्तावेज़ में स्पष्ट है) में यह भी कहा गया है कि—
तीन वर्ष पूरे करने पर RKS कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा
आठ वर्ष पूरे करने पर नियमित पै-स्केल लागू होगा
शर्त सिर्फ यह कि कर्मचारी उसी सोसायटी में निरंतर कार्यरत हों
फिर प्रश्न उठता है—
क्या कर्मचारियों को लाभ देना सिर्फ काग़ज़ों में ही था?
क्या विभाग अपनी सुविधा से कैबिनेट के आदेशों को दरकिनार कर रहा है?
कर्मचारियों के भविष्य का सवाल—सरकार से अब निर्णायक कार्रवाई की मांग
राज्य भर के ये 2,500 कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं।
रिपोर्टिंग के दौरान कर्मचारियों ने बताया कि—
वे लगातार 8–10 वर्षों से सेवा दे रहे हैं
दैनिक कामकाज का पूरा बोझ वही उठाते हैं
लेकिन उन्हें न तो नियमित वेतन मिलता है, न ही नौकरी की सुरक्षा
कर्मचारी वर्ग अब यह स्पष्ट कर चुका है कि—
अगर लाभ लागू नहीं हुए, तो संगठन कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों रास्तों से सरकार को जवाबदेह बनाएगा।
निष्कर्ष
एक ओर स

