शिक्षा

बड़ी ख़बर: हिमाचल में शैक्षणिक कार्यक्रमों का होगा पोस्टमार्टम

तीन क्लस्टरों के स्कूलों में NIEPA करेगा फील्ड स्टडी, विस्तृत रिपोर्ट के साथ देगा सुधार के सुझाव

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*समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने शोधार्थियों को फील्ड के लिए किया रवाना*

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*शिमला*
समग्र शिक्षा ने हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में शैक्षणिक कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर निष्पक्ष और तथ्याधारित अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत देश के प्रतिष्ठित संस्थान National Institute of Educational Planning and Administration (NIEPA) के साथ मिलकर “एक्सटेंशन एंड कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम” शुरू किया गया है। समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने समग्र शिक्षा निदेशालय में NIEPA के दल के साथ बैठक कर उन्हें फील्ड के लिए रवाना किया। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, NIEPA की असिस्टेंट प्रोफेसर कश्यपी अवस्थी सहित शिक्षा विभाग एवं समग्र शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
यह पहली बार है जब समग्र शिक्षा हिमाचल अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों का अध्ययन देश के एक अग्रणी संस्थान के माध्यम से करवा रहा है। NIEPA की इस टीम का नेतृत्व असिस्टेंट प्रोफेसर कश्यपी अवस्थी कर रही हैं, और डॉ. रवि प्रकाश सहित कुल 34 सदस्य इस अभियान में शामिल हैं। यह टीम शिमला जिला के देवगढ़, गुम्मा और देहा क्लस्टरों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों का दौरा कर वहां शिक्षण कार्यक्रमों, नीतियों के क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके आधार पर एक समग्र रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सुधार के लिए ठोस सुझाव भी शामिल होंगे।

*शिक्षा सुधार के लिए सरकार के बहुआयामी प्रयास*
राजेश शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अनेक प्रभावी और दूरगामी कदम उठाए हैं। राज्य में शिक्षकों के नियमित एवं उन्नत प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया है, साथ ही विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का समय-समय पर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जा रहे हैं। स्कूलों में स्मार्ट यूनिफॉर्म की स्वतंत्रता प्रदान कर विद्यार्थियों के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि स्कूली कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अलग से स्कूली शिक्षा निदेशालय का गठन किया गया है, जिससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि हुई है।
इसके साथ ही कंपोजिट स्कूल की अवधारणा को लागू करते हुए प्री-प्राइमरी से लेकर जमा दो तक की कक्षाओं को एक ही परिसर में संचालित किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को निरंतर और समग्र शिक्षण वातावरण मिल रहा है। संसाधनों के बेहतर उपयोग और विद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से क्लस्टर स्कूल प्रणाली भी प्रभावी रूप से लागू की गई है।

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*एफएलएन पर फोकस, सीखने के स्तर में उल्लेखनीय प्रगति*
समग्र शिक्षा निदेशक ने कहा कि शिक्षण में नवीन पद्धतियों को अपनाने और शिक्षकों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) को सुदृढ़ करने के लिए प्रभावी रणनीतियां लागू की गई हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए केरल जैसे अग्रणी राज्य को पीछे छोड़ा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के ‘परख’ सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हुआ है, जबकि पूर्व में आयोजित NAS सर्वे में राज्य का स्थान 21वां था। यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NIEPA के सहयोग से किया जा रहा यह निष्पक्ष अध्ययन एक पारदर्शी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसके सुझाव शिक्षा नीतियों को और अधिक सुदृढ़ एवं परिणामोन्मुख बनाने में सहायक होंगे।
कार्यक्रम के दौरान स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने शोधार्थियों को हिमाचल प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था, भौगोलिक परिस्थितियों और शैक्षणिक पहलों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन राज्य की जमीनी वास्तविकताओं को समझने और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

*स्थानीय परिवारों के साथ रहकर प्रत्यक्ष अनुभव हासिल करेंगे शोधार्थी*
समग्र शिक्षा में नोडल अधिकारी डॉ. मंजूला शर्मा ने शोधार्थियों को विद्यालयों में शिक्षण कार्यक्रमों एवं नीतियों के अध्ययन की प्रक्रिया और तौर-तरीकों से अवगत कराते हुए कहा कि अध्ययन माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि शैक्षणिक कार्यक्रमों का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक किस हद तक पहुंच रहा है तथा किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत NIEPA के शोधार्थी चयनित क्लस्टरों में स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित कर फीडबैक प्राप्त करेंगे। विशेष रूप से शोधार्थी संबंधित क्षेत्रों में स्थानीय परिवारों के साथ रहकर प्रत्यक्ष अनुभव हासिल करेंगे, जिससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त वे स्कूलों में शिक्षकों की क्षमता निर्माण गतिविधियों में योगदान देंगे तथा शिक्षा कार्यक्रमों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करेंगे।
यह उल्लेखनीय है National Institute of Educational Planning and Administration (NIEPA) भारत सरकार का एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान है, जो शिक्षा की योजना, प्रबंधन और नीतियों पर कार्य करते हुए प्रशिक्षण, शोध और नीति सुझाव प्रदान करता है। नई दिल्ली स्थित यह संस्थान शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पहल से हिमाचल प्रदेश को जमीनी अध्ययन और विशेषज्ञ सुझावों के आधार पर शिक्षा नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

Deepika Sharma

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