होली सिर्फ एक दूसरे को रंग लगाने का त्यौहार नहीं, आपसी प्रेम संस्कृति और भाईचारे के साथ सामाजिक प्रेम का उत्सव

होली सिर्फ एक दूसरे को रंग लगाने का त्यौहारनहीं है, यह आपसी प्रेम संस्कृति और भाईचारे के साथ सामाजिक प्रेम का उत्सव है। हमें अपने आपको खुशनसीब समझना चाहिए कि हम ऐसे देश में रहते हैं, जहां इस तरह के पर्व मनाए जाते हैं। हिमाचल की राजधानीशिमला में आज रंगों का पर्व होली पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक माल रोड औरअन्य स्थानों पर लोगों की भीड़ उमड पड़ी। युवा ढोल नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आए पर्यटकों ने भीस्थानीय लोगो के साथ जम कर गुलाल उडाया । “बुरा ना मानो होली है” के नारों से पूरा शहर गूंज उठा। शहरके प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। लोगों ने परिवार की सुख समृद्धि की कामनाकी।
जिंदगी में प्यार और मानवता का रंग होना बहुत जरूरी है, इन रंगों के बिना जिंदगी रंगीनहीन है। रंगोंका त्यौहार हमें यह शिक्षा देता है कि हम हर भेदभाव भूल कर एक दूसरे के साथ होली खेलनी चाहिए। होलीकिसी विशेष धर्म का नहीं बल्कि हर धर्म के लोगों का त्यौहार है, तभी तो हर धर्म के लोग इसे मिलजुल करहर्षोल्लाह से मनाते हैं। विश्व में सबसे ज्यादा त्योहार मेले और पर्व अगर किसी देश में बनाए जाते हैं, तो वह हैभारत। त्योहार हमें अपनी संस्कृति से बांधे रखते हैं और प्रेम भाईचारे का संदेश देते हैं। रंगों का पर्व होली भीहमारे देश में बहुत ही खुशी के साथ मनाया जाता है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त प्रहलाद की रक्षा और अत्याचारी हिरणाकुश की बहन होलिका के दहन कीकथा से यह परंपरा जुड़ी है। इस दिन लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं।बच्चे पिचकारी से रंग खेलते हैं, युवा ढोल नगाड़ों पर नाचते हैं, घरों में गुजिया माल पूरे ठंडाई बनाई जाती है।
बरसाने की होली में श्री राधा और श्री कृष्ण की अनुपम प्रेम और सौंदर्य की झलक देखने को मिलती है और वहां एक ही ध्वनी गूंजती हैं “मोहे अपने ही रंग में रंग दे सांवरिया ।“


