C&V : विशेष वेतन वृद्धि पर जल्द निर्णय के संकेत, सी एंड वी अध्यापक संघ ने शिक्षा मंत्री से की मुलाकात

आज राजकीय सी० एण्ड वी० अध्यापक संघ का एक प्रतिनिधिमण्डल राज्य अध्यक्ष शेर सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में तथा राज्य कृष्ण कुमार राज्य वाइस चेयरमैन, विनोद कुमार राज्य प्रैस महासचिव एवम जिलाध्यक्ष शिमला,महिला मोर्चा राज्य उप प्रधान मैडम अचला और राज्य महालेखाकार एवम जिलाध्यक्ष जीत राम रघुवंशी, बॉबी घेदटा राज्य मुख्य पदाधिकारी, मैडम रजनी महिला मोर्चा प्रधान जिला शिमला, राज शर्मा वित्त महासचिव जिला शिमला, मुख्य राज्य पदाधिकारी राकेश और अनु आदि संगठन के मुख्य पदाधिकारियों के साथ माननीय शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर जी से सी० एण्ड वी० अध्यापक संघ की मुख्य मांग 20 साल की सेवा पूरी होने के उपरान्त मिलने वाली दो विशेष वेतन वृद्धियों को बहाल करवाने के सन्दर्भ में मिला।अतः माननीय शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने संगठन के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि शीघ्र ही उचित कार्यवाही करते हुए सी० एण्ड वी० अध्यापकों को 20 साल की लगातार नियमित सेवा पूरी होने के उपरान्त मिलने वाले विशेष वेतन वृद्धि को बहाल किया जाएगा। जिसके लिए सर्वप्रथम राजकीय सी० एण्ड वी० अध्यापक संघ की राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की घोषणा का धन्यवाद किया।
इसके साथ संगठन के राज्य अध्यक्ष शेर सिंह ठाकुर ने विशेष जानकारी देते हुए कहा है कि संगठन के निवेदन पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी अगले शुक्रवार को माननीय एवम् लोकप्रिय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मिलने का समय दे दिया है। अतः शीघ्र ही सी० एण्ड वी० अध्यापक संघ का शीर्ष नेतृत्व माननीय मुख्यमंत्री श्री सुख विन्दर सिंह सुक्खू से सी० एण्ड वी० अध्यापकों की विशेष वेतन वृद्धि को बहाल करवाने का आग्रह करेगा। क्योंकि पूरे प्रदेश में सी० एण्ड वी० अध्यापक वर्ग एक ऐसा वर्ग है जिसे अपने सेवाकाल में कोई पदोन्नति का लाभ नहीं मिलता है जबकि इसी तर्ज पर प्रदेश के पथ परिवहन निगम के चालकों और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को बिना किसी रूकावट के यह लाभ मिल रहा है, तो संगठन का कहना है कि सी० एण्ड वी० अध्यापकों का भी ये अधिकार बनता है, जिसे वित्त विभाग ने एकतरफा फैसला लेते हुए रोक दिया है। ज्ञात रहे कि 20 साल की सेवा करने के उपरांत मिलने वाला यह लाभ सी० एण्ड वी० अध्यापकों तथा बस ड्राइवरों व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को वर्ष 1999 से निरंतर मिलता आया है तो अब इतने वर्षों बाद रोकने का क्या औचित्य है?




