2 जून तक वार्ता नहीं तो आंदोलन: एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन ने सरकार को दी चेतावनी

2 जून तक वार्ता नहीं तो आंदोलन: एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन ने सरकार को दी चेतावनी
दिनांक: 12 मई, 2026
स्थान: मंडी/शिमला
स्टेट एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन ने निगम प्रबंधन को सौंपा मांग पत्र, 2 जून तक वार्ता न होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
शिमला/मंडी: स्टेट एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन, हिमाचल प्रदेश की एक महत्वपूर्ण त्रैमासिक बैठक 5 और 6 मई को मंडी में संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश भर के परिचालकों की ज्वलंत समस्याओं और लंबित भत्तों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद यूनियन ने निगम के प्रबंध निदेशक को 22 सूत्रीय मांग पत्र प्रेषित कर अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की है।
यूनियन के महासचिव दीपेन्द्र कुमार ने बताया कि परिचालकों के वित्तीय लाभ लंबे समय से लंबित हैं, जिसके कारण कर्मचारियों में भारी रोष है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि निगम प्रबंधन ने 2 जून 2026 तक इन मांगों पर सार्थक चर्चा के लिए यूनियन को नहीं बुलाया, तो संगठन कड़ा निर्णय लेने पर मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन और सरकार की होगी।
प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
लंबित वित्तीय लाभ: पिछले 7 वर्षों का रात्रि व अतिरिक्त समय भत्ता (Night & Overtime Allowance), छठे वेतन आयोग का एरियर और महंगाई भत्ते (DA) का एकमुश्त भुगतान।
वेतन विसंगति: वेतन विसंगति पर उच्च न्यायालय के आदेशों को लागू करना और 4-9-14 की विशेष वेतन वृद्धियां प्रदान करना।
कार्य प्रणाली में सुधार: वेतन का हर महीने समय पर भुगतान, परिचालकों की पदोन्नति, और लंबी दूरी के रूटों पर कंडक्टरों के लिए फ्रंट सीट की सुविधा।
तकनीकी व परिचालन सुधार: बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाना, सवारियों के गिरने से रोकने के लिए प्रेशर वाले दरवाजे लगवाना, और किराया राउंड फिगर में करना।
डिजिटल भुगतान समस्या: सवारियों द्वारा UPI से पेमेंट करने पर टिकट बनाने में आ रही तकनीकी समस्याओं का समाधान।
अन्य मांगें: लगेज पॉलिसी को दुरुस्त करना, बच्चों की आधी टिकट के लिए आयु प्रमाण पत्र की अनिवार्यता, और नई बसों की खरीद प्रक्रिया में यूनियन के पदाधिकारियों को शामिल करना।
यूनियन ने इस मांग पत्र की प्रतियां श्री माननीय मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और परिवहन सचिव को भी भेजी हैं। संगठन का कहना है कि 27 जनवरी 2026 को दिए गए पिछले मांग पत्र पर भी अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है, जिसके चलते अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया गया है।



