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गरीब व जरूरतमंद बच्चों की पढाई का जरिया बनी सुख शिक्षा योजना

2025-26 में 83.77 लाख से शिमला के 1190 बच्चे हुए लाभान्वित

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गरीब व जरूरतमंद बच्चों की पढाई का जरिया बनी सुख शिक्षा योजना

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गरीब व जरूरतमंद बच्चों के लिए इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना वरदान सिद्ध हो रही है। विधवा, अपंग व तलाकशुदा महिलाओं को जहां अपने बच्चों को पढ़ाई करवाने में आर्थिक मदद मिल रही है वहीं बच्चों का भविष्य संवारने में यह योजना कारगर सिद्ध हो रही है। जिला शिमला में 18 साल तक के बच्चों के लिए सुख शिक्षा योजना के तहत आर्थिक मदद प्रदान की गई और उन्हें हर माह सरकार की ओर से 1 हजार रुपए की राशि प्रति माह प्रदान की जा रही है जो उनकी शिक्षा के लिए मददगार साबित हो रही है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पाॅल ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही इस इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के लिए शिमला जिला में पात्र लाभार्थियों को वर्ष 2025-26 में अभी तक 83 लाख 77 हजार रुपए आवंटित किए जा चुके हैं, जिसमें 18 वर्ष तक के 1190 बच्चों को लाभ दिया जा चुका है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही इस इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के लिए पात्र लाभार्थियों की प्रारंभिक शिक्षा की बुनियादी जरूरतें पूरी हो रही है और उच्च शिक्षा के लिए जो आवेदन आ रहे हैं, उन्हें छात्रावास की सुविधा व शिक्षा के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गई इस योजना से गरीब बच्चों को जहां आगे बढने का मौका मिल रहा है, वहीं उन्हें अपना भविष्य तय करने के लिए विभिन्न सुअवसर मिल रहे हैं। प्रदेश व शिमला जिला में जमीनी स्तर पर इस योजना पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें 11 विभिन्न विकास खंडों में यह योजना प्रभावी तरीके से कार्यान्वित की जा रही है। बाल विकास परियोजना की सहायता से यह योजना जहां सिरे चढ़ रही है, वहीं आंगनवाडी कार्यकताओं के प्रयास से उन जरूरतमंद बच्चों तक इस योजना का लाभ पहुंच रहा है, जिन्हें पारिवारिक या सामाजिक कारणों से शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा था। सरकार की यह योजना संजीवनी बनकर बच्चों के भविष्य को सुधारने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

यही नहीं इस योजना का लाभ 18 से 27 वर्ष के उन बच्चों को भी मिल रहा है, जिन्हें अपने शैक्षणिक स्तर को आगे बढ़ाना है। 18 वर्ष की आयु के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी यह योजना कारगर सिद्ध हो रही है। इसमें बच्चे किसी भी तरह की उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा में डिप्लोमा व डिग्री हासिल करने में सक्षम हो रहे है, जिसके लिए उन्हें फीस नहीं चुकानी पड़ेगी और उन्हें छात्रावास की सुविधा भी सरकार की ओर से मुफ्त प्रदान की जाएगी।

महिलाओं ने किया सरकार का धन्यवाद

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सेक्टर-3 न्यू शिमला की शिशुबाला ने बताया कि उनकी 13 वर्षीय बेटी असलीशा स्पेशल चाइल्ड है जोकि उड़ान स्कूल में पढ़ती है।उनको इंदिरा गांधी सुख सीखा योजना की जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से मिली जिसके बाद उन्होंने अपने आवश्यक दस्ताव आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पास जमा करवाए। उन्होंने बताया कि उन्हें योजना का लाभ मिलना शुरू हो चूका है और पहली किश्त के रूप में 3 हजार रूपए प्राप्त हुए हैं।

इसी प्रकार, न्यू शिमला की सुलोचना ने बताया कि उनका 16 वर्षीय बेटा सुजल उड़ान स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा है। उन्हें भी इस योजना की जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनीता से मिली जिसके बाद उन्होंने अपने दस्तावेज उनके पास जमा करवाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी योजना का लाभ मिलना शुरू हो गया है और 3 हजार रूपए की राशि उन्हें प्राप्त हो चुकी है।

शिशुबाला और सुलोचना दोनों ने ही वर्तमान प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का इस योजना को चलाने के लिए धन्यवाद किया है जिससे उनके बच्चों का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित हो रहा है।

नई शिमला सेक्टर 3 की रीनू ठाकुर ने बताया कि उनके पति के देहांत के बाद आर्थिक तंगी के चलते हुए उन्हें उनकी बेटी सृष्टि चंदोला को शिक्षा दिलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। तभी उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनीता से इंदिरा गाँधी सुख शिक्षा योजना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने दस्तावेज उनके पास जमा करवाए। उन्होंने बताया कि उन्हें योजना का लाभ मिलना शुरू हो गया है और अभी तक 6 हजार रुपए की राशि उन्हें प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने अपने जैसी अन्य जरूरतमंद महिलाओं से इस योजना का लाभ लेने का आग्रह भी किया और साथ ही इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का धन्यवाद भी किया।

 

योजना में लाभ लेने के लिए पात्रता

इस योजना में लाभ लेने के लिए आवेदक बीपीएल श्रेणी से संबंध रखता हो व तलाकशुदा व विधवा महिला तथा अपंग, जो 70 प्रतिशत से अधिक हो, वह पात्र माने जाएंगे। 18 वर्ष तक बच्चों को इस योजना में लाभ दिया जा रहा है जो निर्धारित शर्तें पूरी करता हो। इस योजना की पात्रता के लिए आवेदक हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए तथा परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि मुख्यमन्त्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का बच्चों के प्रति काफ़ी स्नेह रहता है और इसी दृष्टिगत उन्होंने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना और इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं बच्चों की शिक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए चलाई हैं। इसी कड़ी में ज़िला प्रशासन इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है ताकि जिला के सभी ज़रूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो और उनका उज्जवल भविष्य सुनिश्चित हो सके।

Deepika Sharma

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