हिमाचल के नामी विशेषज्ञ की बड़ी अपील “ ख़ास ख़बर: स्पीति में बने हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर, केलांग नहीं
डॉ पीसी नेगी की अपील
केलांग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर के उद्घाटन से पूर्व स्पीति घाटी में इस संस्थान की स्थापना को लेकर नई मांग सामने आई है। उच्च हिमालयी चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञ डॉ पीसी नेगी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस परियोजना के स्थान पर पुनर्विचार करते हुए इसे स्पीति घाटी में स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय शोध संस्थान का चयन वैज्ञानिक तथ्यों, रोगों के वास्तविक बोझ, सामरिक महत्व और अनुसंधान की संभावनाओं के आधार पर होना चाहिए।
विशेषज्ञ के अनुसार स्पीति घाटी उच्च हिमालयी चिकित्सा अनुसंधान के लिए देश की सबसे उपयुक्त प्राकृतिक प्रयोगशालाओं में से एक है। यहां की स्थायी आबादी 3,000 से 4,500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर निवास करती है, जहां कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में लंबे समय तक रहने के कारण उच्च पर्वतीय बीमारियों का प्रभाव अधिक देखा जाता है। ऐसे में स्पीति में स्थापित शोध केंद्र उच्च पर्वतीय परिस्थितियों में मानव शरीर के अनुकूलन, बीमारियों की रोकथाम और उपचार पर दीर्घकालिक एवं विश्वस्तरीय अनुसंधान का आधार बन सकता है।
उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत डीआरडीओ द्वारा वित्तपोषित एक महामारी विज्ञान अध्ययन का उल्लेख किया। उनके अनुसार इस अध्ययन में स्पीति घाटी की स्थानीय आबादी के लगभग 30 प्रतिशत लोगों में क्रॉनिक माउंटेन सिकनेस (CMS) तथा करीब 25 प्रतिशत लोगों में हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी हाइपरटेंशन (HAPH) पाए गए। विशेषज्ञ का दावा है कि यह देश में उच्च पर्वतीय बीमारियों के सबसे अधिक दर्ज मामलों में से एक है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस विषय पर शोध के लिए स्पीति सबसे उपयुक्त स्थान है।
उन्होंने कहा कि यदि हाई एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर स्पीति में स्थापित किया जाता है तो इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात भारतीय सशस्त्र बलों के लिए महत्वपूर्ण शोध को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हिमालयी और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ सहयोग, उच्च पर्वतीय स्वास्थ्य संबंधी नीतियों के निर्माण तथा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
विशेषज्ञ ने केंद्र सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना के स्थान का निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों, राष्ट्रीय हित और दीर्घकालिक अनुसंधान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया जाए, ताकि देश को उच्च हिमालयी चिकित्सा अनुसंधान का सर्वश्रेष्ठ केंद्र मिल सके।




