भारत ने मातृ मृत्यु दर में दर्ज की 80 प्रतिशत कमी, डॉक्टर–मरीज के बीच विश्वास बनाए रखने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने की अपील
हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) ने मातृ मृत्यु (Maternal Mortality) को लेकर समाज में फैल रही भ्रांतियों और अफवाहों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रत्येक मातृ मृत्यु अत्यंत दुखद और संवेदनशील घटना है, लेकिन बिना तथ्यों और निष्पक्ष जांच के किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
एसोसिएशन के प्रेस सचिव डॉ. विजय कुमार राय ने जनहित में जारी संदेश में कहा कि चिकित्सा विज्ञान में हर परिस्थिति पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं होता। कई बार गर्भवती महिला अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचती है या अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, संक्रमण, गंभीर एनीमिया तथा अन्य जटिल चिकित्सीय कारणों के चलते सभी आधुनिक उपचार और विशेषज्ञों के अथक प्रयासों के बावजूद जीवन बचाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे मामलों को बिना जांच चिकित्सा लापरवाही मान लेना उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारत ने मातृ मृत्यु दर (MMR) में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। वर्ष 1990 में जहां यह आंकड़ा प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 437 था, वहीं नवीनतम सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2021–23 के अनुसार यह घटकर 88 रह गया है। संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व नियमित जांच, जननी सुरक्षा योजनाओं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हुई है। हालांकि वर्ष 2030 तक MMR को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य अभी भी शेष है।
HMOA ने स्पष्ट किया कि मातृ मृत्यु के पीछे केवल चिकित्सीय कारण ही नहीं, बल्कि अस्पताल जाने का निर्णय लेने में देरी, समय पर अस्पताल न पहुंच पाना और उपचार मिलने में विलंब जैसी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये ऐसे कारक हैं जो कई बार डॉक्टरों के नियंत्रण से बाहर होते हैं।
एसोसिएशन ने कहा कि यदि किसी मामले में चिकित्सा लापरवाही या निर्धारित उपचार मानकों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया की अपुष्ट जानकारियों या भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के आधार पर किसी चिकित्सक की छवि धूमिल करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास भी कमजोर करता है।
HMOA ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने, एनीमिया का समय पर उपचार कराने, संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने तथा गर्भावस्था के दौरान किसी भी खतरे के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
डॉ. विजय कुमार राय ने कहा कि प्रत्येक मां का जीवन अनमोल है और उसकी सुरक्षा स्वास्थ्य व्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास, सहयोग और सम्मान का वातावरण बनाए रखें तथा किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों और निष्पक्ष जांच का सम्मान करें।




