स्वतंत्रता दिवस पर मेजर जनरल ए.के. शोरी का संदेश: राष्ट्र निर्माण में ज्ञान, संस्कार और जिम्मेदार नागरिकता की अहम भूमिका

स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी का पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को याद करने और देश के भविष्य के लिए नई संकल्प-शक्ति के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। राष्ट्रसेवा के साथ-साथ लेखन, चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करने वाले मेजर जनरल ए.के. शोरी (सेवानिवृत्त) का मानना है कि आजादी की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब समाज ज्ञान, संस्कार, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मेजर जनरल ए.के. शोरी ने कहा कि “राष्ट्र निर्माण केवल सीमाओं की रक्षा करने से नहीं होता, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होने से होता है। हमें अपनी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से सीख लेकर उसे वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप जीवन में उतारना होगा।”
भारतीय डाक सेवा के वर्ष 1982 बैच के अधिकारी रहे मेजर जनरल ए.के. शोरी ने भारतीय सेना में 21 वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दीं। अक्टूबर 2011 से मार्च 2015 तक उन्होंने एडिशनल डायरेक्टर जनरल, आर्मी पोस्टल सर्विस कॉर्प्स (ADG APS) के रूप में आर्मी पोस्टल सर्विस का नेतृत्व किया। इसके बाद जुलाई 2016 में वे सदस्य, डाक सेवा बोर्ड के पद से सेवानिवृत्त हुए।
अपने सैन्य एवं प्रशासनिक अनुभव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि “राष्ट्रसेवा का अर्थ केवल किसी एक पद या जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। सेवा की भावना जीवन के हर क्षेत्र में बनी रहनी चाहिए। सेवानिवृत्ति के बाद लेखन और चिंतन के माध्यम से समाज के साथ अपने अनुभव और विचार साझा करना भी मेरे लिए राष्ट्रसेवा का ही एक रूप है।”
जनरल शोरी ने भारत और विदेशों में कई प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। इनमें आईआईएम अहमदाबाद, एशिया पैसिफिक पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर, बैंकॉक तथा स्विट्जरलैंड का एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम प्रमुख हैं।
वे एक प्रखर पाठक, उत्साही अध्येता, सामाजिक चिंतक और लेखक हैं। सामाजिक विषयों पर उनके लेख विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। वे ASARNEWZ.COM के लिए भी नियमित रूप से लेखन करते हैं।
अपने लेखन के उद्देश्य पर मेजर जनरल शोरी ने कहा, “हमारे प्राचीन ग्रंथों और भारतीय दर्शन में जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत गहरा ज्ञान मौजूद है। आवश्यकता इस बात की है कि हम उस ज्ञान को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उसकी प्रासंगिकता को आज के जीवन और समाज की समस्याओं से जोड़कर समझें।”
उन्होंने व्यवहार विज्ञान का व्यापक अध्ययन किया है और पंचतंत्र की कथाओं तथा रामायण और महाभारत में निहित जीवन-मूल्यों एवं सुशासन के सिद्धांतों को आधुनिक प्रबंधन से जोड़ने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि भारतीय ज्ञान परंपरा में नेतृत्व, व्यवहार, निर्णय क्षमता, नैतिकता और सुशासन के ऐसे अनेक सूत्र मौजूद हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
जनरल शोरी अब तक छह पुस्तकों के लेखक हैं—‘Indian Rajarshi and Greek Philosopher King’, ‘Seven Shades of Rama’, ‘Why We Are Like This’, ‘Invisible Shades of Ramayana’, ‘अक्ल बड़ी या गूगल बाबा’ और ‘दो कदम आगे, एक कदम पीछे’। Seven Shades of Rama का हिंदी रूपांतरण ‘भगवान श्री राम के सात रूप’ के नाम से प्रकाशित हुआ है।
स्वतंत्रता दिवस और नई पीढ़ी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि “आज के युवाओं के सामने अवसर बहुत हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। तकनीक हमें गति दे सकती है, लेकिन सही दिशा हमें अपने संस्कार, विवेक और ज्ञान से ही मिलेगी। हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”
जनरल शोरी का मानना है कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि विचारों की स्वतंत्रता, जिम्मेदार नागरिकता, आत्मनिर्भर सोच और समाज के प्रति संवेदनशीलता भी है। उनके अनुसार, यदि प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे, तो देश की प्रगति और मजबूत हो सकती है।
सेना और प्रशासन में लंबे अनुभव के बाद लेखन को अपना माध्यम बनाने वाले जनरल शोरी आज भी अध्ययन और चिंतन में सक्रिय हैं। वे सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं और भारतीय दर्शन तथा प्राचीन साहित्य में छिपे ज्ञान को सरल एवं आधुनिक भाषा में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
गोल्फ के भी उत्साही खिलाड़ी मेजर जनरल ए.के. शोरी का व्यक्तित्व अनेक आयामों को समेटे हुए है—सैनिक, प्रशासक, लेखक, अध्येता और सामाजिक चिंतक। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्रसेवा की कोई एक सीमा नहीं होती। वर्दी में देश की सेवा करने के बाद भी ज्ञान, विचार और लेखन के माध्यम से समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान दिया जा सकता है।
उनका स्पष्ट संदेश है कि “आजादी हमें अधिकार देती है, लेकिन राष्ट्र को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।” यही जिम्मेदारी, जागरूकता और सकारात्मक सोच स्वतंत्रता दिवस की भावना को वास्तविक अर्थों में मजबूत करती है।


