
शिमला यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण संरक्षण में रचा इतिहास, मिला ‘गोल्ड सस्टेनेबल कैंपस पार्टनर’ सम्मान

शिमला, जून 25
पर्यावरण की रक्षा और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में हिमाचल प्रदेश की शिमला यूनिवर्सिटी (एपीजी) ने एक बड़ी कामयाबी अपने नाम कर ली है! शिमला यूनिवर्सिटी को “भारत पर्यावरण प्रोग्राम” में शानदार भागीदारी और यूनिवर्सिटी कैंपस में पर्यावरण संरक्षण अभियान, साफ-सफाई, पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण जागरूकता, रीसाइक्लिंग, ग्रीन एनर्जी, और कचरा प्रबंध के लिए सम्मानित किया गया है।
इतना ही नहीं शिमला यूनिवर्सिटी को “गोल्ड सस्टेनेबल कैंपस पार्टनर” का बेहद प्रतिष्ठित दर्जा भी मिला है! यह हिमाचल प्रदेश और शिमला यूनिवर्सिटी के लिए एक गर्व का पल है।
भारत सरकार द्वारा पृथ्वी सप्ताह के दौरान 22 से 29 अप्रैल 2026 तक एक महा-अभियान चलाया गया था, जिसका नाम था ‘भारत सस्टेनेबिलिटी कैंपस मिशन 2026’। इस खास प्रोग्राम का आयोजन रिसर्च हाइट्स फाउंडेशन हैदराबाद द्वारा एनवायरमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (ईपीटीआरई) के सहयोग से किया गया था और इस प्रोग्राम में भारत की लगभग चार सौ यूनिवर्सिटीज ने भाग लिया था और पर्यावरण की रक्षा और सस्टेनेबिलिटी से संबंधित किए गए कार्यों को प्रस्तुत किया गया था और इस मिशन में शिमला यूनिवर्सिटी ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पर्यावरण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को साबित कर दिखाया। शिमला यूनिवर्सिटी को यह सम्मान उनके कैंपस में पर्यावरण जागरूकता, सस्टेनेबिलिटी से जुड़े बेहतरीन कार्यों, और छात्र-छात्राओं व फैकल्टी की सक्रिय भागीदारी के लिए दिया गया है। शिमला यूनिवर्सिटी के कैंपस ने रीसाइक्लिंग, ग्रीन एनर्जी, और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनुकरणीय प्रदर्शन किया है और पर्यावरण की दृष्टि से यूनिवर्सिटी का इन्फ्रास्ट्रक्चर और कैंपस पेड़- पौधों से हरा- भरा और हमेशा स्वच्छता को संजोए हुए है। एनएसएस के स्वयं सेवियों, छात्रों, प्रोफेसरों, डीन ने मिलकर ‘सस्टेनेबल भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए कड़ी मेहनत की है। इस उपलब्धि के बाद शिमला यूनिवर्सिटी को 01 जून 2026 को रिसर्च हाइट्स फाउंडेशन द्वारा आधिकारिक सर्टिफिकेट जारी कर सम्मानित किया है।
एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ. प्यार ठाकुर ने कहा कि यह सिर्फ एक सर्टिफिकेट व अवार्ड नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए शिमला यूनिवर्सिटी की एक बड़ी पहल और प्रेरणा है। इस उपलब्धि पर शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान, प्रो-चांसलर प्रो. रमेश चौहान, सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत, रजिस्ट्रार प्रो. आर.एल. शर्मा, डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. नीलम शर्मा, डीन फैकल्टी प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, एसोसिएट डीन एकेडमिक्स डॉ. ज्योत्सना शर्मा, डीन डॉ. मनिंदर कौर और यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने शिमला यूनिवर्सिटी की एनएसएस यूनिट, एनएसएस स्वयं सेवियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को बधाई दी है।



