अजेय और प्रशांत की कविताओं में महाकाव्य के गुण और प्रेम की ऊर्जा

शिमला में दोनों कवियों के संग्रहों का हुआ लोकार्पण
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ठियोग। प्रख्यात कवि एवं आलोचक प्रो सत्यपाल सहगल ने कहा है कि हिमाचल में आदिवासी समाज से आई कविता का प्रतिनिधित्व लाहौल के प्रतिष्ठित कवि अजेय करते हैं। वे शिमला के गेटी में अजेय के कविता संग्रह ‘ इन सपनों को कौन गाएगा’और चम्बा के कवि प्रशांत रमण रवि के कविता संग्रह ‘मैने प्रेम चुना ‘ के लोकार्पण के अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड तथा हिमालय साहित्य संस्कृति पर्यावरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राकेश कंवर बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहे। प्रो सहगल ने कहा कि अजेय का यह संग्रह महाकाव्यात्मकता के गुण लिए हुए है और उनकी कविताओं का मिज़ाज़ और विषय वस्तु हिंदी की शेष आदिवासी कविता से जुदा है। प्रशांत रवि के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं ने प्रेम के अलावा सामाजिक जीवन के विभिन्न आयामों का भी चित्रण किया है।
मुख्य अतिथि राकेश कंवर जी ने अपने उद्बोधन में कहा, “अजेय की अपनी माँ के बारे में कविताएं अद्भुत रूप से मर्मस्पर्शी कविताएं हैं। माता – पिता के नहीं रहने के बाद जब आप उनके होने को मिस करते हैं तब आपको लगता है कि और बेहतर तरीके से उनके साथ रह सकते थे…”
प्रशांत के बारे में उन्होंने कहा, “नौजवान दो तरह से कवि हो सकता है, एक वो जो प्यार में हैऔर एक वो जो विद्रोही है। प्रशांत प्रेम वाले कवि हैं।
वरिष्ठ लेखिका मीनाक्षी एफ पॉल और कुल्लू से आईं सुप्रसिद्ध लेखिका इशिता आर गिरीश ने दोनों कवियों पर आलोचनात्मक लेख पढ़े। शोधार्थी नेहा शर्मा ने दोनों कविता संग्रहों से कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर कई साहित्यकर्मी मौजूद थे। कार्यक्रम का मंच संचालक प्रोफेसर श्रवण कुमार तथा दीप्ति सारस्वत ने किया। अतिथियों का स्वागत आधार के निदेशक देश निर्मोही और धन्यवाद औपचारिक अभिनंदन करते समय आधार प्रकाशन के संस्थापक देश निर्मोही ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के बारे में और आधार प्रकाशन की योजनाओं के बारे में सभी को अवगत करवाया तथा वर्ष 2026 के आधार सम्मान के लिए वरिष्ठ कथाकार ‘योगेन्द्र आहूजा’ के नाम की घोषणा की।
कार्यक्रम में युवा शोधार्थी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय नेहा शर्मा ने दोनों कवियों की पुस्तकों में से कविताओं का सुंदर पाठ किया। अवसर पर हिमालय सहित्य संस्कृति पर्यावरण मंच के संस्थापक एस. आर. हरनोट ने सभी का धन्यवाद किया।



