अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ‘न्यू ग्लोबल इकोनॉमिक ऑर्डर’ पर गहन मंथन
23 विषयों के प्राध्यापक/शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए 132 शोधपत्र

राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय (कोटशेरा), चौड़ा मैदान,शिमला में दो दिवसीय( 8-9 मई,2026) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ‘न्यू ग्लोबल इकोनॉमिक ऑर्डर’ पर गहन मंथन |
Navigating the Indian Economy in New Global Economic Order” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन( 8-9 मई,2026) का राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय (कोटशेरा), चौड़ा मैदान,शिमला में शुभारंभ हुआ
सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति निर्माताओं एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस सम्मेलन के संयोजक डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में 23 विभिन्न विषयों से संबंधित लगभग 132 शोध सार प्रस्तुत किए गए। शोध पत्रों की प्रस्तुति के लिए 6 समानांतर ऑफलाइन एवं ऑनलाइन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
उद्घाटन सत्र में डॉ गोपाल चौहान, प्राचार्य, राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों के दौर में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने शिक्षाविदों, शोधार्थियों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद एवं ज्ञान साझेदारी को समय की आवश्यकता बताया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रोफेसर सचिन शर्मा, डीजी,आरईएएस (RIS),नई दिल्ली ने “न्यू ग्लोबल इकोनॉमिक ऑर्डर” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में “Survival of the Fattest” अर्थात पूंजी एवं निवेश की शक्ति निर्णायक भूमिका निभा रही है। उन्होंने डेविड रिकार्डो के “Theory of Comparative Advantage” का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि Research and Information System for Developing Countries (RIS) वर्ष 1983 से नीति निर्माण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सहयोग की भावना से कार्य करना चाहिए।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर महावीर सिंह, कुलपति, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में साइबर सुरक्षा, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों तथा थोरियम रिएक्टर जैसे विषयों को भविष्य की आवश्यकता बताया। उन्होंने दुर्लभ खनिजों एवं वैकल्पिक चुंबकीय पदार्थों, विशेष रूप से फेराइट मैटेरियल पर शोध को समय की मांग बताया। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच शोध सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रोफेसर हर्ष सदावरती , कुलपति, देश भगत विश्वविद्यालय ,मंडी गोबिंदगढ़, पंजाब ने अपने संबोधन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने
देश भगत विश्वविद्यालय ,मंडी गोबिंदगढ़, पंजाब एवं राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश
के मध्य हस्ताक्षरित एमओयू (MoU) को शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
प्रोफेसर नंदन नौन, आरबीआई चेयर, प्रोफेसर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ,नई दिल्ली ने “Embedded Carbon Emission” और “Carbon Credit” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए सतत विकास आधारित आर्थिक मॉडल अपनाना अनिवार्य है।
पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ सुरेंद्र सिंह चौहान कृषि विभाग ,मेलबर्न विश्वविद्यालय ,ऑस्ट्रेलिया ने अपने ऑनलाइन संबोधन में
कृषि, पशुपालन और वैश्विक अर्थव्यवस्था के अंतर- संबंध पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में डॉ.नंद दुलाल दास, निदेशक( ट्रेनिंग), नेशनल एकेडमी आॉफ ऑडिट एंड अकाउंट्स ,शिमला ने अपने संबोधन में में “Indian Blue Economy: An Ocean of Potential” विषय पर विशेष चर्चा की। उन्होंनेसमुद्री मत्स्य संसाधनों, गहरे समुद्र में खनिजों के दोहन हेतु “Deep Sea Mission”, समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि तथा सतत समुद्री विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-14 “Life Below Water” के महत्व को भी रेखांकित किया गया।ऐसे आयोजन भारत की नई आर्थिक दिशा, वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास के मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन सचिव डॉ .पी .एल. वर्मा ने धन्यवाद भाषण दिया| उन्होंने बताया कि सम्मेलन का समापन 9 मई को होगा


