पर्यावरण

क्या आपने देखा हिमालय का यह अनोखा अभियान? 12 जिलों में एक साथ होगी पक्षियों की गणना

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हिमालयन बर्ड काउंट (HBC) एक अनोखा नागरिक सहभागिता आधारित पक्षी गणना अभियान है, जिसे 9 मई 2026 को हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों में आयोजित किया जाएगा। इस अभियान में पक्षी प्रेमी, प्रकृति प्रेमी, विद्यार्थी, वन अधिकारी, फोटोग्राफर, संरक्षण कार्यकर्ता और स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर भाग लेंगे और हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता को रिकॉर्ड करेंगे।

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हिमालयन बर्ड काउंट हर वर्ष मई महीने के दूसरे शनिवार को आयोजित किया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2022 में Bird Count India, Bird Conservation Nepal और Royal Society for Protection of Birds, Bhutan द्वारा की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य हिमालय की अद्भुत पक्षी विविधता का उत्सव मनाने के साथ-साथ लोगों का ध्यान हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण और उसके संरक्षण की ओर आकर्षित करना है।

हिमालय दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है, जहाँ दुनिया की लगभग 10 प्रतिशत पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों, घने जंगलों, घास के मैदानों और नदी घाटियों में कई दुर्लभ और स्थानीय पक्षी प्रजातियाँ निवास करती हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन, जंगलों का लगातार कम होना और बढ़ते मानवीय दबाव के कारण इन पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

पक्षियों को पर्यावरण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। उनके व्यवहार, प्रवास, संख्या और रहने के स्थानों में होने वाले बदलाव हमें प्रकृति में हो रहे परिवर्तनों का संकेत देते हैं। हर साल एक ही दिन पक्षियों की गणना और रिकॉर्डिंग करने से वैज्ञानिकों और संरक्षण कार्यकर्ताओं को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी प्रजातियाँ सुरक्षित हैं और किन्हें संरक्षण की अधिक आवश्यकता है।

इस दौरान प्रतिभागी हिमालयी क्षेत्रों में कहीं से भी पक्षियों का अवलोकन करेंगे और अपने रिकॉर्ड eBird मोबाइल ऐप के माध्यम से अपलोड करेंगे। प्रतिभागियों से अपील की गई है कि वे कम से कम 15 मिनट की पूरी चेकलिस्ट तैयार करें और जिन पक्षियों को देखें या सुनें, उनकी सही संख्या दर्ज करें। यदि संभव हो तो दिनभर में कई चेकलिस्ट भी अपलोड की जा सकती हैं।

यह आयोजन विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले “Global Big Day” और भारत के “Endemic Bird Day” के साथ भी जुड़ा हुआ है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

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क्षेत्रीय Bird Count India समन्वयक Santosh kumar Thakur ने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को अपने आसपास मौजूद पक्षियों के बारे में जागरूक करने का एक बहुत अच्छा माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि हमें पक्षियों को केवल देखना ही नहीं बल्कि उनकी उपस्थिति को महसूस करना और उनके महत्व को समझना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डाटा तैयार होता है, जिसके माध्यम से यह समझा जा सकता है कि पक्षियों की संख्या बढ़ रही है या वे किसी खतरे का सामना कर रहे हैं। इससे समय रहते संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक जिले में इस आयोजन को सफल बनाने के लिए 3 से 4 पक्षी समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। ये समन्वयक स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय समुदायों में बर्ड वॉक, जागरूकता कार्यक्रम और व्याख्यान आयोजित करेंगे ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।

Dr. Amit Kumar, आईएएस उपायुक्त किन्नौर ने बताया कि किन्नौर में पहली बार 8 से 10 मई 2026 तक “बर्ड फेस्टिवल” आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस फेस्टिवल में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी 9 मई को होने वाले हिमालयन बर्ड काउंट में भी हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को हिमालय के नाजुक पर्यावरण और यहाँ की जैव विविधता को समझने का अवसर देते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को प्रकृति और पक्षियों के प्रति जोड़ने का एक शानदार माध्यम हैं। यदि युवा बर्डिंग को अपने शौक के रूप में अपनाते हैं, तो वे लंबे समय तक प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े रहेंगे, जो भविष्य में संरक्षण के लिए बहुत सकारात्मक कदम साबित होगा।

आयोजकों ने प्रदेश के नागरिकों, विद्यार्थियों, शिक्षण संस्थानों, वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों और स्थानीय समुदायों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

**“हर गिना गया पक्षी, हिमालय के नाजुक पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”**

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थानीय बर्डिंग समूहों और जिला समन्वयकों द्वारा बर्ड वॉक, जागरूकता अभियान और पक्षी अवलोकन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Deepika Sharma

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