पर्यावरण

असर विशेष : लॉकडाउन से बदली हिमाचल की आबोहवा… पर कब तक रहेगा सबक याद?

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एक तरफ लॉकडाउन ने सारे संसार की गति को धीमा कर दिया और लोगों की आजीविका को कम कर दिया  तथा मनुष्य को एक ही कमरे में रहने के लिए बाध्य कर दिया। वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन पर्यावरण के लिए वरदान साबित हुआ। और एक सबक भी लेकर आया।

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हिमाचल प्रदेश में लॉकडाउन का सीधा असर पर्यावरण  पर पड़ा और हिमाचल कहीं हद तक प्रदूषण मुक्त हो गया। अक्सर यह समझा जाता रहा है कि प्रदूषण का राक्षस कई  कई इलाकों में तन कर खड़ा हो गया है ।जिसे खत्म कर पाना मुश्किल है लेकिन ऐसा नहीं है यदि इंसान चाहे तो वह ऐसा कर सकता है ।

लॉक डाउन के दौरान  कई ऐसी चीजें थी जो अब शायद ही  अपनाई जाएगी ।जिसमें खासतौर पर इंसान अपने कमरे में बंद नहीं रहेगा। लेकिन यदि इंसान इन मुख्य बिंदु पर गौर करें तो प्रदूषण के स्तर में काफी कमी देखी जा सकती है। 

पर्यावरणवितो का कहना है कि हिमाचल प्रदेश की हवा,पानी बहुत बदल गए । हिमाचल प्रदेश के कुछ जिलों में पर्यावरण में काफी अच्छा बदलाव दिखा । कांगड़ा जिले के नदी नालों का पानी साफ हो गया ।तथा वनस्पति भी गहरी और साफ हो रही है। पेड़ पौधों का जीवन बढ़ गया है तथा सिरमौर जिले की हवा से भी जहरीले कण गायब हो गए हैं 100 माइक्रोग्राम से अब  लॉकडाउन में 50 से 60  ये हो गए हैं। यही नहीं मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड का एहसास हो रहा है तथा मौसमी क्षेत्रों से पहाड़ भी नजर आ रहे हैं तथा व्यास नदी में प्रदूषण की मात्रा कम हुई है।

 

हिमाचल प्रदेश में नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तर में कमी आई है। प्रदूषण के स्तर में कमी का कारण सिर्फ लॉकडाउन ही है क्योंकि लॉकडाउन के कारण लोगों ने वाहनों का प्रयोग नहीं किया, जिससे हवा में नाइट्रोजन ऑक्सीजन की कमी हो गई है 

 

सिरमौर की आबोहवा अब ऐसी

लॉकडाउन के 50 दिनों की अवधि में सिरमौर की आबोहवा स्वच्छ हो गई । हवा से जहरीले कण गायब हो गए। हवा में 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक रहने वाले कण (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लॉकडाउन में 50 से 60 ही पाए गए। से मैदानी इलाकों से पहाड़ और उन पर जमी बर्फ साफ नजर आ रही थी।

 

 

 

 

सिरमौर की हवा अब ऐसी

 सिरमौर के मैदानी क्षेत्रों की आबोहवा में जहर घुल रहा था। कालाअंब क्षेत्र में धूलकण का स्तर 130-135 ओयूजी/एम3 था।

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वहीं, पांवटा सहित आसपास के अन्य क्षेत्रों का भी यही हाल था।वैज्ञानिकों के अनुसार हवा में मिट्टी के कण 100 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर पार्टस से ज्यादा नहीं होने चाहिए।

प्रदूषण के स्तर में 50 फीसदी से अधिक की कमी आंकी गई है। अब हवा काफी स्वच्छ हो गई है।

ब्यास में प्रदूषण अब ऐसा

 

 

 

लॉकडाउन के बीच ब्यास नदी में प्रदूषण की मात्रा कम हुई है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल धार्मिक त्रिवेणी के नाम से मशहूर रिवामसर झील खुद ब खुद साफ हो गई है।

हर साल गर्मियों और बरसात में यहां लाखों की संख्या में मछलियां प्रदूषण से दम तोड़ती थी, लेकिन इस बार लॉकडाउन और कर्फ्यू के बंद के कारण यहां प्रदूषण नहीं फैला।  

 

साइकिल पर या पैदल चल रहे लोग

वाहनों के सफर में कमी आई है। पैदल और साइकिल से आसपास की दूरी तय करने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। लॉकडाउन की वजह से अब तक हवा में प्रदूषण का स्तर कुछ कम हुआ है। नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्तर में भी कमी आई है।

यह भी सामने आया कि जब व्यक्ति अंदर कमरे में बंद था तो उसने कूड़े को फेंकने का साधन बेहतर तरीके से अपनाया क्योंकि कूड़ा लेने वाला समय पर घरों में आया और उसने सही तरह निष्पादन कूड़े का कियाl जो इधर-उधर नहीं फेंका गया जिसमें नजदीक के नदी नाले अक्सर पहले गंदगी के शिकार होते थे जो अब काफी साफ दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं यह भी देखने में आया है कि सड़कों के किनारे जो पौधे पहले प्रदूषण के कारण मुरझा जाते थे वहा भरे भरे हैं।

शिमला में कुछ नए पक्षियों का आगमन  हुआ । अभी तक शिमला में सर्दियों में आने वाले पक्षियों की नई 10 प्रजातियों को रिपोर्ट किया जा चुका है ,जो कि हिमाचल प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ़बारी के कारण निचले क्षेत्रों की ओर माइग्रेट करते हैं । अभी तक शिमला में निम्नलिखित प्रजातियां शिमला आई।
1.Rock Bunting.
2.White-capped Bunting.
3.Rufous breasted Accentor.
4.Black throated Accentor.
5.Pink browed Rosefinch
6.Common Rosefinch.
7.Yellow -breasted Greenfinch.
8 Plain Mountainfinch.
9.Black-throated Thrush.
10. Red-headed Serin.

 

 

Deepika Sharma

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