विघटित होते हुए जीवन मूल्य ही युद्ध का कारण है…..सौम्या सांबशिवन

हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा आज ऐतिहासिक गेयटी थिएटर सभागार में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर “युद्ध और श्रम पर” आधारित एक संवाद और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में उप पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत साहित्य अनुरागी सौम्या सांबशिवन पधारी। कार्यक्रम के विशेष अतिथि पूर्व एच ए एस अधिकारी हिमाचल सरकार डी के मांटा, प्रो. इंदर सिंह ठाकुर, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और दिल्ली से पधारी कवयित्री , आलोचक और शिक्षिका ममता जयंत रहें।

मुख्य अतिथि सौम्या सांबशिवन ने हिमालय मंच के इस आयोजन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समय की मांग है जिसमें साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों का उत्तरदायित्व बढ़ जाता है। अपरोक्ष रूप में कलम भी एक युद्ध लड़ रही होती है और एक कामगार भी जिनका काम केवल शांतिपूर्वक सृजन और निर्माण करना होता है। सौम्या ने युद्ध की विभीषिका पर इतिहास के पन्नों से लेखकों की रचनाओं के कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने अपना एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि एक बार उन्होंने एक महिला मजदूर को तीन साड़ियां भेंट कीं। उसने उनमें से केवल दो को स्वीकार किया और यह कहा कि “मैं दो ही पहन पाऊंगी, तीसरी नहीं” और यह कहकर उसने तीसरी साड़ी मुझे लौटा दी। उसका यह संतोष देखकर मुझे आश्चर्य हुआ कि एक गरीब मजदूर होने के बाद भी उसके मन में कोई लालच नहीं है मजदूर की संवेदनाएं और आत्मविश्वास तथा स्वाभिमान हमारे लिए प्रेरणा देने वाला है। इसलिए बहुत बड़े-बड़े भवन बनाने वाले मजदूरों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
विशेष अतिथि डी के मांटा ने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की ऐतिहासिकता बताते हुए कहा कि मज़दूर दिवस हर साल 1 मई को 1889 से दुनिया भर में मनाया जाता है। भारत में पहली बार इसे 1923 में मद्रास (अब चेन्नई) में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान* ने आयोजित किया था। उन्होंने श्रम कानूनों पर विस्तार से अपनी बात रखी और मजदूर हित में कई योजनाओं का जिक्र किया। इंद्र ठाकुर ने हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच के साहित्यिक आयोजनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मंच ने साहित्य संस्कृति और पर्यावरण मंच के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। विशेषकर नवोदित सृजनकर्ता को ठोस आधार प्रदान किया है। ममता जयंत ने कहा कि युद्ध विखंडन करता है और श्रम सृजन करता है। मन के धरातल पर भी युद्ध चल रहा होता है। श्रम में मजदूरों को बारीकी से देखने की जरूरत है। मजदूरों की स्थितियां अच्छी नहीं है। उन्होंने मजदूर और युद्ध पर कई बेहतरीन कविताओं का पाठ भी किया।
मंच का सुंदर संचालन जानीमानी लेखिका, कवयित्री दीप्ति सारस्वत ने कई उद्धरणों के साथ किया।
मंच के अध्यक्ष एस आर हरनोट मुख्य स्थिति सौम्या जी का पधारने के लिए विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और अन्य विशेष अतिथियों का भी। उन्होंने सभागार उपलब्ध करवाने के लिए भाषा और संस्कृति विभाग तथा गेयटी प्रशासन का भी धन्यवाद किया।
इस गोष्ठी में सोलन, मंडी, धर्मशाला, सिरमौर और शिमला के विभिन्न स्थानों से लेखक पधारे थे जिनमें डॉक्टर रोशन लाल जिंटा, अनंत आलोक, जगदीश कश्यप, अनिता शर्मा, सिकंदर कुमार, कमला भोयल, स्नेह नेगी, सलिल शमशेरी, कुलदीप गर्ग तरुण, कौशल्या ठाकुर, कल्पा गांगटा, किशन श्रीमान, राधा सिंह,पूजा सूद, लेखराज चौहान, वंदना राणा, जगदीश हरनोट, यादव चंद, हेमलता, भूप रंजन, प्रदीप, पवन शर्मा, हरदेव सिंह धीमान, पीयूष, जाह्नवी, स्वप्निल सूर्यांश और कई अन्य साहित्य अनुरागी उपस्थित रहे।
प्रैस सचिव
01.05.2026



