जूनगा से न्याय को मजबूती—फॉरेंसिक लैब का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड पर टेस्ट

जूनगा स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में NABL का दो दिवसीय आकलन संपन्न
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हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित जूनगा में राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL) में राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) की टीम द्वारा 28 और 29 अप्रैल को दो दिवसीय वार्षिक आकलन किया गया। इस आकलन का उद्देश्य प्रयोगशाला की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता और कार्यप्रणाली का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मूल्यांकन करना था।
आकलन दल का नेतृत्व डॉ. ओंकार संतोषराव मोंधे ने किया। टीम में डॉ. कविता गोयल, डॉ. राजीव कवात्रा, डॉ. अमन कुमार यादव और डॉ. एच. जे. त्रिवाली जैसे देश के प्रतिष्ठित फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल रहे। टीम ने प्रयोगशाला के गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र, तकनीकी प्रणाली तथा फॉरेंसिक विशेषज्ञों की क्षमता का विस्तृत निरीक्षण किया।
यह वार्षिक आकलन अंतरराष्ट्रीय मानक ISO/IEC 17025:2017 के तहत किया जाता है, जो परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशालाओं की दक्षता के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों को परिभाषित करता है। इस मानक के अनुरूप कार्य करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फॉरेंसिक रिपोर्ट्स जांच एजेंसियों को सौंपी जाती हैं और न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं।
फॉरेंसिक सेवाओं की निदेशक डॉ. मीनाक्षी महाजन ने बताया कि SFSL हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2018 से NABL की मान्यता प्राप्त है और वर्तमान में यह 10 विशेषीकृत विभागों में कार्यरत है। इनमें बायोलॉजी एवं सेरोलॉजी, केमिस्ट्री एवं टॉक्सिकोलॉजी, डीएनए, डिजिटल फॉरेंसिक, फिंगर प्रिंट ब्यूरो सहित अन्य महत्वपूर्ण इकाइयां शामिल हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2024 में राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो को NABL मान्यता प्राप्त हुई, जिससे यह भारत का पहला मान्यता प्राप्त फिंगर प्रिंट ब्यूरो बन गया। यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश की फॉरेंसिक क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करती है।
NABL मान्यता प्राप्त होने से प्रयोगशाला द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक स्वीकार्यता मिलती है। इससे न केवल फॉरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्धि दर (conviction rate) में भी सुधार की उम्मीद रहती है।
डॉ. महाजन ने कहा कि वर्तमान समय में देशभर की फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं NABL द्वारा निर्धारित मानकों को अपना रही हैं, ऐसे में वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
यह आकलन हिमाचल प्रदेश की फॉरेंसिक संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न्याय प्रणाली को बेहतर और अधिक विश्वसनीय वैज्ञानिक सहयोग प्रदान करेगा।



