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हिमाचल से केरल तक साहित्य का सेतु, अनुवाद से बढ़ी सांस्कृतिक निकटता

हिंदी रचनाओं की गूंज अब मलयालम में

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हिमाचल से केरल तक साहित्य का सेतु, अनुवाद से बढ़ी सांस्कृतिक निकटता

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मलयालम अनुवाद की चार किताबें लोकार्पित : केरल से लेखक, अनुवादक भी रहे उपस्थित : एस आर हरनोट के दो उपन्यास और एक कहानी संग्रह तथा राजन तनवर की कविता पुस्तक मलयालम में।

 

हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच शिमला हिमाचल प्रदेश द्वारा आज ऐतिहासिक गेयटी थिएटर सभागार में एक दिवसीय राष्ट्रीय मलयालम अनु वाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें हिंदी से मलयालम में अनुवादित चार पुस्तकों का लोकार्पण मुख्य अतिथि हिमाचल दस्तक के मुख्य संपादक श्री हेमंत, प्रख्यात आलोचक डॉ. हेमराज कौशिक और वरिष्ठ लेखिका और अनुवादक प्रो.मीनाक्षी एफ पॉल,केरल से पधारे लेखक अनुवादक प्रो.(डॉ.) श्रीलता विष्णु, डॉ.मोहनन वी टी वी और डॉ. इंदु के.वी द्वारा किया गया। एस आर हरनोट के उपन्यास नदी रंग जैसी लड़की और हिडिंब उपन्यास के अनुवाद क्रमशः श्रीलता विष्णु और मोहनन वी टी वी तथा राजन तनवर के कविता संग्रह कोई “बांध लो मुझे”

का संयुक्त रूप से मोहनन और इंदु ने किया है। तीनों अनुवादकों भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में फैलो रहे हैं।

 

मुख्य अतिथि हेमंत ने दोनों लेखकों की पुस्तकों के मलयालम अनुवाद के लिए उन्हें बधाई दी और अनुवादकों का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने हिमाचल को बड़ा सम्मान दिया है। हेमंत ने कहा कि किसी कृति का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद होना जहां उस किताब की पाठकों तक पहुंच बनाता है वहां एक दूसरी भाषाओं के इतिहास, संस्कृति और स्थानीयता से भी परिचय होता है। उन्होंने हिमालय मंच और मंच के संचालक प्रसिद्ध लेखक हरनोट को इसलिए विशेष बधाई दी कि वे निरंतर लेखन के साथ साहित्यिक आयोजनों में भी बहुत ईमानदारी से सक्रिय हैं तथा बच्चों, छात्रों, युवाओं और सभी पीढ़ी के लेखकों को मंच प्रदान कर रहे हैं जिससे साहित्य के प्रसार प्रचार को बल मिल रहा है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण बात है कि हिमालय मंच किसी अनुदान पर आश्रित नहीं है बल्कि लेखकों के आपसी सहयोग से कार्यक्रम करता रहा है।

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डॉ.हेमराज कौशिक और प्रो.मीनाक्षी एफ पॉल ने अनुवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए केरल से पधारे अनुवादकों का विशेष आभार व्यक्त किया। मीनाक्षी पॉल ने बताया कि वे एस आर हरनोट की कई कहानियों के अनुवाद कर चुकी हैं जिनमें कैंब्रिज स्कॉलर लंदन से छपी “कैट्स टॉक” कहानी संग्रह की वैश्विक पटल पर व्यापक चर्चा हुई है। अब वे नदी रंग जैसी लड़की उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद कर रही हैं। कौशिक और मीनाक्षी ने राजन तनवर को भी बधाई दी।

 

अनुवादक लेखकों ने बताया कि एस आर हरनोट केरल के पाठ्यक्रमों में पढ़ाए जा रहे हैं और उन पर पहली पी एच डी केरल विश्वविद्यालय में ही हुई है। विद्यार्थियों और पाठकों में हरनोट जी की कहानियां बहुत लोकप्रिय हैं। इसीलिए अब मलयालम में उनकी और राजन तनवर की कृतियां और विस्तार पाएगी। उन्होंने कहा कि इस अनुवाद से हिमाचल, हिंदी भाषा और केरल तथा मलयालम भाषा एक ही परिवार में आ गए हैं जो दोनों राज्यों के लिए बहुत अच्छी बात है।

 

प्रख्यात लेखिका, अनुवादक प्रो.(डॉ.) श्रीलता विष्णु सीनियर प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय केरल, डॉ इन्दू के वी

एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, केरल विश्वविद्यालय, कार्यवटटम, तिरुवनंतपुरम और डॉ मोहनन वी.टी.वी. एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी विभाग, सर सईद कॉलेज, तल्लिपरंबा, कणपूर, केरल में कार्यरत हैं।

 

मंच का सफल संचालन कवि मोटीवेटर जगदीश बाली ने सुंदर अंदाज में किया तथा कवयित्री, कहानीकार दीप्ति सारस्वत ने अनुवादक लेखकों से सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों को परिचित करवाया। संगोष्ठी में 70 से अधिक वरिष्ठ, युवा, छात्र लेखक और साहित्य अनुरागी उपस्थित रहे।

 

Deepika Sharma

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