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अब स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई नहीं, भावनात्मक मजबूती भी सिखाई जाएगी

SEE लर्निंग: भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक दक्षता के विकास के लिए शिक्षक प्रशिक्षण

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*समग्र शिक्षा, पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से स्कूलों में लागू कर रहा SEE लर्निंग कार्यक्रम*

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*शिमला*
समग्र शिक्षा स्कूली छात्रों में सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक (SEE) लर्निंग को बढ़ावा दे रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए पिरामल फाउंडेशन के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की गई है। इस साझेदारी के तहत स्कूलों में SEE लर्निंग को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश एवं पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक लर्निंग पर दो दिवसीय क्षमता विकास कार्यशालाओं का आयोजन किया गया।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यशालाओं में कुल 50 से विद्यालयों के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने भाग लिया। कांगड़ा में आयोजित कार्यशाला में उप निदेशक (गुणवत्ता), समग्र शिक्षा भाग सिंह तथा डाइट कांगड़ा के प्राचार्य राकेश शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कार्यशाला में 30 स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने भाग लिया।
वहीं, हमीरपुर की दो दिवसीय कार्यशाला में उप निदेशक (गुणवत्ता), समग्र शिक्षा नवीन कुमार और उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, हमीरपुर कमल किशोर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यशाला में 20 स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने भाग लिया।
इन कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य 21वीं सदी की शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक दक्षताओं की समझ विकसित करना था। कार्यशालाओं के दौरान प्रतिभागियों को SEE लर्निंग की अवधारणा, इसके महत्व तथा इसे विद्यालय स्तर पर कैसे लागू किया जाए, इस बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अनुभवात्मक अधिगम, समूह चर्चा, चिंतन अभ्यास तथा गतिविधि-आधारित सत्रों के माध्यम से सीखने के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस अनुभव के माध्यम से शिक्षकों को आत्म-करुणा, विचार जाल (थिंकिंग ट्रैप्स), लचीलापन (हाई, ओके एवं लो जोन), पारस्परिक निर्भरता एवं करुणा जैसे विषयों को समझने और सीखने का अवसर मिला।
कार्यशालाओं में शिक्षकों ने SEE लर्निंग की अवधारणाओं को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों तथा विद्यार्थियों के व्यवहार से जोड़ा। इससे उन्हें विद्यार्थियों के साथ SEE लर्निंग गतिविधियाँ संचालित करने हेतु आत्मविश्वास, सकारात्मक दृष्टिकोण और बेहतर समझ विकसित हुई। कार्यशालाओं के दौरान प्रतिभागियों ने विद्यालय-स्तरीय LAPs (लाइव एक्शन प्रोजेक्ट्स) भी तैयार किए, जो स्कूलों में SEE लर्निंग को लागू करने में मदद करेंगे।
ये शिक्षक स्कूलों में इस कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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*आगामी तीन महीनों के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार*
कार्यक्रम के समापन पर आगामी तीन महीनों के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई, ताकि भावनात्मक रूप से सशक्त, मूल्य-आधारित और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके। इस प्रकार की योजनाएँ छात्रों के सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और स्कूल को एक सुरक्षित तथा संवेदनशील सीखने के स्थान के रूप में विकसित करती हैं।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल सरकार ने समग्र शिक्षा के तहत सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक (SEE) लर्निंग कार्यक्रम शुरू किया है। पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में 21वीं सदी के कौशल, नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक व्यवहार तथा आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना है। इस साझेदारी के माध्यम से हिमाचल सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि हर बच्चे के लिए उज्जवल और मजबूत भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
पिरामल फाउंडेशन की ओर से कार्यशालाओं का संचालन राजेंद्र ठाकुर, प्रोग्राम मैनेजर (हिमाचल प्रदेश), हीना कालरा, प्रोग्राम मैनेजर (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस टीम), मनीष यादव, पीएम (रांची), परमोद बक्शी, पीएम (जेएनके) तथा गांधी फेलोज — अनुप्रिया, कृष्णा, जगन, अभिषेक एवं अपर्णा द्वारा किया गया, जिन्होंने सत्रों को प्रभावशाली ढंग से संचालित किया।

Deepika Sharma

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