शिक्षा

शिक्षा मंत्री की अगुवाई में हिमाचल का शैक्षणिक दल पहुंचा अंगकोर वाट

*विश्व के सबसे बड़े हिंदू मंदिर का किया दौरा, भारतीय संस्कृति और इतिहास से हुए रूबरू

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*शिमला*

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हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अगुवाई में कंबोडिया और सिंगापुर के शैक्षणिक भ्रमण पर गए 50 मेधावी विद्यार्थियों के दल ने आज कंबोडिया में स्थित विश्व प्रसिद्ध अंगकोर वाट मंदिर का दौरा किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने इस भव्य मंदिर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य कला की गहराई से जानकारी प्राप्त की। शिक्षा मंत्री के साथ पूर्व सीपीएस आशीष बुटेल , समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित अन्य अधिकारी भी इस यात्रा में शामिल हैं।

*अंगकोर वाट विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर*
अंगकोर वाट कंबोडिया के अंकोर क्षेत्र में स्थित है और यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मंदिर है, जो 162.6 हेक्टेयर (402 एकड़) में फैला हुआ है। इस भव्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में हुआ था। अंगकोर वाट यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और इसकी दीवारों पर रामायण और महाभारत जैसे भारतीय महाकाव्यों के दृश्यों की अद्भुत नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर खमेर शैली में बना है, जिसमें ऊंचे टावर, विस्तृत गलियारे और नक्काशीदार दीवारें शामिल हैं। मंदिर की ऊंचाई 65 मीटर है और इसका मुख्य टॉवर चार छोटे टावरों से घिरा हुआ है, जो इसकी भव्यता को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।

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*मंदिर की अद्भुत वास्तुकला*
यह मंदिर तीन स्तरों में बना हुआ है, जिसमें हर स्तर पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। मुख्य मंदिर सबसे ऊपरी स्तर पर स्थित है, जहां से पूरा परिसर दिखाई देता है। मंदिर के चारों ओर साढ़े तीन किलोमीटर लंबी पत्थर की दीवारें हैं, जो इसे एक किले जैसा स्वरूप प्रदान करती हैं। मंदिर के बाहरी क्षेत्र में 700 फीट चौड़ी खाई बनी हुई है, जिससे अंदर जाने के लिए 36 फीट चौड़ा पुल बनाया गया है। इस मंदिर का प्रवेश द्वार 1000 फीट चौड़ा है, जो इसकी भव्यता का प्रमाण है। विद्यार्थियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर के विस्तृत परिसर का भ्रमण किया और मंदिर की जटिल नक्काशी, विशाल खंभों और ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। इस अनुभव ने उन्हें भारतीय और दक्षिण-पूर्व एशियाई संस्कृतियों के आपसी संबंधों को समझने में मदद की।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने कंबोडिया के अंगकोर वाट मंदिर के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विद्यार्थियों के लिए सीखने का अनूठा अवसर
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह सिर्फ भ्रमण नहीं, बल्कि सीखने का एक अनूठा अवसर है। कक्षा से बाहर निकलकर विश्व की महान धरोहरों को नजदीक से देखने और समझने से उनका वैश्विक दृष्टिकोण विकसित होगा। साथ ही, वे अपनी संस्कृति और अन्य सभ्यताओं के बीच संबंधों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

*सिंगापुर के विज्ञान और नवाचार को भी जानेंगे विद्यार्थी*
कंबोडिया के बाद यह शैक्षणिक दल सिंगापुर के लिए रवाना होगा, जहां वे आधुनिक विज्ञान, तकनीकी नवाचार और सांस्कृतिक धरोहरों से रूबरू होंगे। यह दल सिंगापुर साइंस सेंटर और ओमनी थिएटर जाकर वहां विज्ञान और तकनीकी प्रगति की जानकारी हासिल करेगा। विद्यार्थी यूनिवर्सल स्टूडियो, टाइम कैप्सूल और सिंगापुर फ्लायर जाकर डिजिटल तकनीक और मनोरंजन उद्योग में विज्ञान के प्रभाव से भी रूबरू होंगे। गार्डन्स बाय द बे और सिंगापुर नाइट सफारी जैसी जगहों पर जाने से विद्यार्थी जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण से भी अवगत होंगे।

*मुख्यमंत्री ने 7 फरवरी को किया था दल को रवाना*
इससे पहले, 7 फरवरी को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला से प्रदेश के 50 मेधावी स्कूली छात्रों को कंबोडिया और सिंगापुर की शैक्षणिक यात्रा पर रवाना किया था। यह पहली बार है जब किसी राज्य के स्कूली विद्यार्थियों को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण का अवसर मिला है। इस तरह कंबोडिया-सिंगापुर की इस यात्रा से विद्यार्थियों को न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की जानकारी मिलेगी, बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नए अनुभव प्राप्त होंगे।

Deepika Sharma

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