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डीएवी स्कूल कुमारसैन में दोहावली एवं कविता गोष्ठी आयोजित, कवि, साहित्यकार हितेन्द्र शर्मा बतौर मुख्यअतिथि हुए शामिल

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डीएवी स्कूल कुमारसैन में दोहावली एवं कविता गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सर्वप्रथम सिद्धार्थ और साथियों ने दोहावली का सुन्दर प्रस्तुति पेश की काव्यपाठ में हर्षिता, अवनी, प्लाक्षा, दिव्या, येशस, अनन्या, सेजल, आर्यन, धृतुल, लावण्या, इशिता, आर्या, योगेन्द्र, महक, वशिंका, मेधांशी, मान्या, धान्या एवं शैरिन ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

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इस अवसर पर मुख्यअतिथि हितेन्द्र शर्मा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कवि होता है, बनता नहीं है। कवि शब्द से कविता या काव्य शब्द बनता है, कविता से कवितज्ञ या काव्य से काव्यज्ञ शब्द नहीं बनता। कविता के संदर्भ में, कर्म नहीं कर्ता मौलिक है, प्रधान है। कवि जो सृजित कर रहा है, वह कविता है। अन्य में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि गणितज्ञ जो सिद्धांत दे रहा है, वह गणित है या दार्शनिक जो उद्घाटन कर रहा है वह दर्शन है। मात्र कवि ही एक ऐसी प्रतिभा है जो पहले से विद्यमान किसी ज्ञान का रहस्योद्घाटन नहीं कर रहा है। वह रच रहा है, सृजन कर रहा है. वस्तुतः इसी कारण शास्त्रों में शब्द को ब्रह्म लिखा गया है क्योंकि शब्द में रचने का, सृजन कर पाने का गुण है। कवि होना सौभाग्य है क्योंकि कवि एक मौलिक सर्जक है और मानव होना भाग्य है।

 

हितेन्द्र शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय पुनर्जागरण के पुरोधा, प्रख्यात समाज सुधारक, वेदों के भाष्यकार, भारतीय धर्म-दर्शन और संस्कृति को पुनः स्थापित करने वाले स्वामी दयानंद सरस्वती की 200 वें जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संपूर्ण विश्व में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस कडी में डीएवी कुमारसेन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है।

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स्वामी दयानंद ने विश्व की शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति के लिए आर्य समाज की स्थापना की। उन्होंने वेद तथा वैदिक साहित्य के प्रचार प्रसार के लिए भारत का भ्रमण करते हुए जन जागरण अभियान चलाया। दलित, वंचित, शोषित वर्ग और नारी जाति के सम्मान के लिए प्रयास किया। बाल विवाह, सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए आंदोलन चलाया।

 

वैदिक शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए गुरुकुलों की स्थापना की, कालांतर में महात्मा हंसराज ने आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए लाहौर में दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल की स्थापना की, वर्तमान में विश्व भर में डीएवी की अनेक संस्थाएं कार्य कर रही हैं।

 

डीएवी प्रबंध समिति के अध्यक्ष पद्मश्री पूनम सूरी जी एक महान शिक्षाविद हैं जिनके मार्गदर्शन में डीएवी परिवार सफलतापूर्वक अनेकों शिक्षण संस्थाओं का संचालन कर रहा है। आज हम सभी के लिए यह प्रसन्नता की बात है कि डीएवी स्कूल कुमारसेन द्वारा काव्य पाठ का आयोजन किया गया है।

 

यह इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच मिलता है, उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा होता है और वे अपनी भावनाओं, अपने विचारों को प्रकट करने के योग्य बनते हैं।

 

कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रमेश शर्मा और संजीव खदैक ने मुख्यअतिथि का स्वागत किया प्रधानाचार्य रमेश शर्मा ने मुख्यअतिथि हितेन्द्र शर्मा को सम्मानित कर उनका कार्यक्रम में शामिल होने पर आभार प्रकट किया। इस अवसर पर डीएवी के अध्यापक संजीव खदैक, चन्दन शर्मा, गोविन्द राणा, सुचिता मैहता, अनुजा पराशर, शीतल, अंशुल शर्मा, निशांत शर्मा कार्यक्रम में मौजूद रहें। कार्यक्रम का खूबसूरत संचालन आर्या महंत, मानव पमराल, वैदेही शर्मा एवं तन्मय वर्मा आदि छात्र/छात्राओं ने किया।

Deepika Sharma

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