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गुरु और राहु का साथ में बैठना और शनि की दृष्टि का गुरु पर आना शुभ संकेत नहीं – पंडित शशिपाल डोगरा

कहा - अचानक ही आ सकता है कोई बड़ा राजनीतिक भूचाल, हो सकती है किसी बड़े नेता की राजनीतिक पारी ख़त्म 

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22 अप्रैल, 2023 को अक्षय तृतीया के दिन दशक की सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटनाओं में से एक उस समय घटेगी, जब बृहस्पति मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

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जाने माने अंक ज्योतिषी एवं वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा कहते हैं कि बृहस्पति प्रत्येक वर्ष राशि परिवर्तन करते हैं और मेष से मीन राशि तक 12 वर्षों में अपना चक्र पूरा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन आप जो भी नया कार्य आरंभ करेंगे, वह नष्ट नहीं होगा, दीर्घकाल तक बना रहेगा। 22 अप्रैल, 2023 से एक नए चक्र में प्रवेश करके बृहस्पति अपना आशीर्वाद देंगे।

पंडित डोगरा के मुताबिक हर चार साल में बृहस्पति एक ऐसे बिंदु पर आते हैं जब वह गंडांत से होकर गुजरते हैं। गंडांत वह स्थान है जहां जल और अग्नि राशियों का मिलन होता है। इस वर्ष यह, मीन जल राशि और मेष अग्नि राशि में से गुजरेंगे। जब भी बृहस्पति इस बिंदु से होकर गुजरते हैं तो व्यक्ति अपने जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में विशेष रूप से पहले दो या तीन महीनों में निराश, असंतुष्ट महसूस करता है और अक्सर गलत निर्णय ले लेता है और कुछ ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हो सकता है जो उसकी उन्नति में सहायक नहीं है। लेकिन गंडान्त में भ्रमण करते हुए बृहस्पति जो भी घाव देता है, बृहस्पति के मेष राशि में आते ही वह ठीक होने लगता है। यह अश्विनी नक्षत्र से शुरू होता है और इस नक्षत्र में यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर बहुत आरोग्य प्रदान करता है, इसलिए यदि आप विशेष रूप से पिछले कुछ महीनों से बहुत कठिन समय से गुजर रहे हैं, तो यह अब एक अच्छा समय है और आप उपचार पाएंगे। आपकी स्मृति पर अंकित ये सभी कठिनाइयां और नकारात्मक अनुभव अब आपको छोड़ देंगे।

 

*क्या कहती है अंक गणना*

 

पंडित शशिपाल डोगरा कहते हैं कि अंक ज्योतिष के हिसाब से 22 अप्रैल 2023 को गुरु मेष राशि में प्रवेश करेगा। 2+2=4 अंक जो राहु का अंक है। राहु एक चांडाल ग्रह है। गुरु जो मेष राशि में प्रवेश करगा। मेष राशि का 1 अंक बनता है। जो सूर्य का अंक है। सूर्य सत्ता का कारक है। यश का कारक है। वहीं, गुरु बुद्धि का कारक विवेक का कारक। राहु का प्रभाव जब गुरु पर पड़ता है तो उसे चांडाल योग कहते हैं। जिस कारण बुद्धि में नकारात्मक बातें आनी शुरू हो जाती है। बुद्धि भर्मित हो जाती है। विवेक भी काम नहीं करता अंहकार ज्यादा आ जाता है। वाणी पर संयम नहीं रहता। गुरु और राहु का साथ में होना। झूठे आरोपों को भी देता है।

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पंडित डोगरा के मुताबिक 190 दिनों तक गुरु और राहु का साथ में बैठना शुभ संकेत नहीं है।1+9+0=10=1+0=1 अंक जो सूर्य का अंक है। इन 190 दिनों के अंदर राजनीती में किसी बड़ी उथल पुथल के संकेत देता है। कुछ लोगों के सपने चूर होंगे।और अचानक कुछ लोगों को पद की प्राप्ति होगी। प्रदेश और देश के अंदर किसी बड़े संकट के योग बन रहे है। उनका कहना था कि राहु के भय से लोग धार्मिक कार्य अधिक कर सकते हैं। नेताओं से लोगों का मोह भंग हो सकता है। अपनी ही पार्टी के आगे नेताओं को भिक्षा मांगनी पड़ेगी। राहु और गुरु का योग भिक्षुक बना देता है। वहीं, शनि की दृष्टि का गुरु पर आना भी शुभ संकेत नहीं है। अचानक ही कुछ बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है। किसी बड़े नेता की राजनीतिक पारी ख़त्म हो सकती है। जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। दुर्घटना का योग व किसी बड़े नेताओं को खोने का भय बना रहेगा। अचानक ही कोई चुनाव भी हो सकता है। कुछ लोग विवेक शून्य होंगे और पद को त्याग देंगे। सभी लोग इससे बचने के लिए विष्णु भगवान की पूजा करें। अपने माता पिता गुरु व बड़ों का आदर करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

*गुरू चांडाल योग कैसे बनता है?*

 

पंडित डोगरा कहते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में गुरु चांडाल योग को बहुत अनिष्टकारी योग बताया गया है। इसलिए इस योग का निर्माण एक ऐसे ग्रह के युति से बनता है, जिससे सभी जातक बचने का प्रयास करते हैं। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु चांडाल योग का निर्माण अनिष्टकारी ग्रह राहु और बुद्धि के देवता गुरु ग्रह के युति से बनता है। कुंडली में इस योग के निर्माण से जातकों के जीवन पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता और उसे कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 

*गुरू चांडाल योग के लक्षण और प्रभाव*

पंडित शशिपाल डोगरा कहते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जब भी किसी जातक की कुंडली में चांडाल योग का निर्माण होता है तो उसके जीवन में समस्याओं का अंत दूर-दूर तक नजर नहीं आता है। इस योग का प्रमुख लक्षण यह है कि व्यक्ति के चरित्र पर समय-समय पर लांछन लगता रहता है। जिसके कारण वह परेशान भी रहता है। साथ ही अगर जातक को परिवार, मित्र, भूमि व भवन का सुख प्राप्त नहीं हो रहा है, तो यह इस अशुभ योग के कारण हो सकता है। इसके साथ यदि प्रतिभावान छात्र भी पढ़ने में समस्याओं का सामना कर रहे हैं और जातकों को नौकरी में भी समस्याएं आ रही हैं तो उन्हें भी किसी ज्योतिष विद्वान से सलाह-विमर्श करना चाहिए।

इसके साथ हम इस योग के प्रभाव की बात करें तो चांडाल योग के कारण पिता और पुत्र में हर समय तनाव बना रहता है। साथ ही व्यक्ति को आसान निर्णय लेने भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस योग का प्रभाव आर्थिक क्षेत्र पर भी पड़ता है और व्यक्ति को इससे जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बता दें कि मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, वृश्चिक, कुंभ व मीन राशि के जातकों पर इस योग अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है। बाकी सर्वज्ञ तो ईश्वर है।

सत्यदेव शर्मा सहोड़*

Deepika Sharma

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