
रिटायर्ड मेजर जनरल एके शौरी की कलम से

श्रुपनखा – एक राजनीति विशेषज्ञ
श्रुपनखा के बारे में हमारा ज्ञान अत्यंत सीमित है. हमें सिर्फ यही मालूम है कि श्रुपनखा पहले श्रीराम पर और फिर लक्ष्मण पर आसक्त हो गयी और जब सीता को परेशान करने से नहीं हटी तो श्रीराम ने क्रोधित हो कर लक्ष्मण को कहा कि उसे सबक सिखाया जाया।
जब लक्ष्मण ने श्रुपनखा के नाक व कान काट दिए तो वह रोती हुई रावण के पास गयी और नमक -मिर्च लगा कर तो बताया ही, साथ ही सीता के सौन्दर्य का भी इस तरह से बखान किया कि रावण सीता को अपनी पत्नी बनाने हेतु लालायित हो गया. आगे की कथा हमें मालूम है. लेकिन राज्य-शासन और कूटनीति के बारे में उसके ज्ञान के बारे हमें कुछ भी मालूम नहीं है।प्रशासन व जासूस -तन्त्र के बारे उसका ज्ञान असीमित था. जब उसे लगा कि श्रीराम व लक्ष्मण के हाथों उसका अत्यंत अपमान हो गया है तो क्रोधित हो कर और अपने अपमान का बदला लेने के लिए उसने रावण के सम्मुख दुहाई दी।. लेकिन साथ ही उसने रावन से राज्य- प्रशासन के बारे में कुछ कठोर प्रशन भी किये, जिसका वर्णन वाल्मीकि रामायण में इस प्रकार से दर्शाया गया है।

श्रुपनखा की रावन को राजा के कर्तव्य संबंधी परामर्श (अरण्य काण्ड सर्ग ३३, शलोक २,३,४,६,८,,१५ ,१६,१७,१८,१९ )
श्रुपनखा कहती है कि हे राजन, लालसयों से बंधे हुए, अनैतिक संबंधों में लिप्त हुए और अपनी इच्छायों को बेकाबू करते हुए तुम आनंद में तो हो, लेकिन एक इतना भयंकर खतरा तुम्हारे सर के ऊपर मंडरा रहा है, उसे तुम नहीं देख पा रहे हो. लोग-बाग़ ऐसे लालची शासक को आदर व सम्मान के साथ नहीं देखते जो कि अपनी लालसा-पूर्ती में अपने ही आनंद में लगा हुआ हो, जैसे कि शमशान में जल रही आग, ऐसा शासक जो कि अपने शासन के बारे में स्वंय रूचि नहीं लेता, उसका शासन व उसका राज्य बिना किसी देर के जल्द ही समाप्त हो जाते हैं, ऐसा याद रखना।ऐसे शासक, जो अपनी जीती हुई भूमि को अपने कब्ज़े में नहीं रख पाते, वे शानदार तरीके से नहीं चमकते और उनका हाल ऐसा हो जाता है जैसे कि समुंद में डूब रहे पर्वत. हे राजन, आप निस्संदेह बचकाने तो हो ही, आप में बुद्धिमता की भी अत्यंत कमी है और आप को नहीं मालूम कि आप को क्या क्या मालूम होना चाहिए। इसलिए, ऐसे में, हे दानव राज, आप राजा कब तक बने रहेंगे?
ऐसा शासक जो कि क्रूर, निर्दयी , लापरवाह, घमंडी व धोखेबाज़ हो, जब मुसीबत में फँस जाता है तब कोई भी उसकी सहायता हेतु सामने नहीं आता है. यहाँ तक कि उसके अपने लोग् भी ऐसे शासक का, जो कि घमंडी होने के साथ-साथ अत्यंत शेखी बघारने वाला हो, उसका वध करने से नहीं हिचकिचाते। ऐसा राजा जो अपना कर्तव्य पालन नहीं करता और अपने राज्य उपर छा रहे खतरे के बारे में जानकारी नहीं रखता, बहुत जल्द ही अपने राज्य से हाथ धो बैठता है और उसकी अवस्था इस संसार में एक तिनके जैसी हो जाती है. सूखी हुयी लकड़ियों से कुछ लाभ प्राप्त हो सकता है, धूल व मिट्टी से भी लाभ मिल सकता है, लेकिन ऐसे शासक जो अपने स्थान से नीचे गिर चुके हों, उनसे कुछ भी किसी का भी फायदा नहीं हो सकता।जिस प्रकार, एक इस्तेमाल हो चुका वस्त्र व पहनाया जा चुका फूलों का हार (दूसरों के लिए) बेकार हो जाता है, उसी तरह से कितना भी शक्तिशाली राजा क्यों न हो, राज्य खो चुक जाने के उपरांत पूर्णतया बेकार हो जाता है।
श्रुपनाखा के जासूस -तंत्र बारे में विचार ( अरण्य कांड सर्ग ३३, शलोक ५,७, ९, १०,११,१२,१३,१४,२०,२१,२२,२३,२४,)
लोग ऐसे शासक से दूरी बना लेते है, जिसने जासूस तंत्र की व्यवस्था नहीं कर रखी हो. ऐसा शासक अपनी प्रजा को अपने साथ बंधे रखने में असमर्थ हो जाता है, उसका स्वंय पर भी काबू नहीं होता और उसकी हालत ऐसे हाथी जैसी हो जाती है जो कि एक नदी के कीचड से हिचकिचाता है. देवतायों, गंधर्वों और दानवों संग युद्ध करते हुए, आप अपने खुद के स्वामी हो और आपने जासूस तंत्र की स्थापना नहीं कर रखी, तो ऐसे में आप कैसे उम्मीद रखते हो कि आप एक शासक के रूप में बने रहे, जबकि आप इसमें इतने कमज़ोर हो? हे राजन, ऐसे शासक जिनके जासूस, कोषागार व नीति उनके आधीन नहीं होती, वे शासक एक साधारण व्यक्तित्व के होते हैं. ऐसा इसलिए कि लोगों पर शासन करने वाले शासक अपने जासूसों की सहायता से दूर -दूर तक की गतिविधियों पर अपनी निगह रख लेते है, इसीलिये उन्हें दूरदर्शी कहा जाता है।मेरा ऐसा निष्कर्ष है कि आपने अपने राज्य में कुशल जासूस नियुक्त नहीं किये हैं और आप अशिक्षिक सलाहकारों के अनुसार चल रहे है, जिसके फलस्वरूप आपको मालूम ही नहीं है कि आपके क्षेत्र में आपके प्रजा जन मारे जा रहे हैं और आपके आधीन इस राज्य का बुरा हाल हो रहा है।
चौदह हजार से भी अधिक असुर तथा खर और दूषण जैसे वीरों का राम ने अकेले ही काम तमाम कर दिया है. राम ने ऋषियों को सुरक्षा प्रदान करने का वायदा कर दिया है और उनके लिए सारा क्षेत्र भी तैयार कर दिया है।दूसरी और, हे दानव राज, तुम एक ऐसे हो जो कि धन-दौलत के लालची, लापरवाह और लालसयों के वश में हो चुके हो और इस समय अपने राज्य उपर मंडरा रहे खतरे को नहीं भांप पा रहे हो. याद रहे, ऐसा राजा ही ज्यादा देर तक शासन करता है, जो कि अपने स्वंय व अपने राज्य के बारे में जागरूक है, जिसने अपनी इन्द्रियों पर काबू पा लिया है और जो दूसरों की सेवाओं को अच्छी तरह से समझता भी है और अपने आचरण में नेक हो।ऐसा शासक हमेशा प्रजा द्वारा सम्मान की निगाह से देखा जाता है, जो सोते हुए भीअपनी आँखें औरअपनी समझ की निगाहें खुली रखता है, जिसकी तिरछी नजर व मुस्कान सज़ा व इनाम की सूचक हैै। निस्संदेह हे रावण, तुम बेवकूफ तो हो ही, साथ ही तुम में इन सभी नेक व उदार आदतों की कमी भी है, क्योंकि इतने दानवों का वध हो रहा है, और तुम्हें कोई खबर नहीं है।
इसलिय, दूसरों के प्रति सम्मान न रखते हुए,केवलअपनी लाल्सायों की पूर्ती करते हुए न तो आप को सच में ही सही समय व स्थान का ज्ञान है और न ही आप अपने दिमाग से किसी कार्य के गुण और दोष का अवलोकन कर रहे हो, इसलिय जल्द ही तुम्हारा साम्राज्य घिर कर बर्बाद हो जाएगा।




