शिक्षा

बड़ी खबर : 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाएं न होने के लिए कौन जिम्मेवार ? 

बच्चों का मनोबल गिरना चिंता का विषय : चौहान

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हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की आपात वर्चुअल बैठक प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक का आयोजन सरकार द्वारा आनन-फ़ानन में बोर्ड परीक्षाओं के स्थगन पर चर्चा करना था। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा राज्य महामंत्री श्याम लाल हाण्डा, वित्त सचिव देव राज ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता एवं मुख्य प्रैस सचिव कैलाश ठाकुर, मुख्य संरक्षक अरुण गुलेरिया, राज्य चेयरमैन सचिन जस्वाल, संरक्षक-अजीत चौहान, सरोज मेहता, मनोहर शर्मा, विजय गोस्वामी, वरिष्ट उपाध्यक्ष- संजीव ठाकुर, कमल राज अत्रि, मुकेश शर्मा, उपाध्यक्ष- गोविंद्र पठानिया, नरेंदर गौरव, राजीव ठाकुर, जय दर्शन शर्मा, मुख्य सलाहकार कपिल पावला, मुख्यालय सचिव तारा चन्द शर्मा, मुख्य वेब एवं सोशल मीडिया सचिव रमन वर्मा, सलाहकार-जोगिन्न्द्र चौधरी, डॉ कुलदीप अत्रि, इंद्र सिंह, सहायक वित्त सचिव सुरेश भारद्वाज, चेयरमैन एन पी एस विंग कुलदीप शर्मा, सचिव शिक्षा बोर्ड मामले- राज कपूर, भारत भूषण, जी एस डाडवाल, लेखा परीक्षक संदीप ठाकुर, राज्य अध्यक्ष महिला विंग कविता बिजलवान, उपाध्यक्ष-रीना भारद्वाज, ममता चौधरी,इंदू कश्यप, अनुपम शर्मा, राज्य अध्यक्षों में शिमला की महावीर कैंथला, बिलासपुर के राकेश संधु, चम्बा के हरी प्रसाद शर्मा, हमीरपुर के सुनील शर्मा, काँगड़ा के नरदेव ठाकुर, किन्नौर के राधा कृषण नेगी, कुल्लू के यशपाल शर्मा, लहौल के पालम शर्मा, मंडी के तिलक नायक, सिरमौर के राजीव ठाकुर, सोलन के रणधीर राणा, ऊना के किशोरी लाल आदि ने भाग लिया। बैठक में सभी ने एक मत से सरकार व शिक्षा बोर्ड द्वारा परीक्षाओं के स्थगित करने वाले निर्णय की भर्त्सना की तथा तर्क दिया की संगठन बोर्ड व सरकार के द्वारा आयोजित की गई प्री बोर्ड परीक्षाओं के वक़्त भी बार बार कह रहा था की प्री बोर्ड की परीक्षाओं के स्थान पर इन कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएँ करवानी चाहिए बर्ना इसे न ही करवाया जाए कियुंकि ऐसी परीक्षाओं का कोई औचित्य नही है,पर उस बक्त तर्क दिया गया की प्रश्न-पत्र छप चूके हैं और ऐसा न करने से पैसे बर्बाद हो जाएँगे। अगर सरकार ने उस वक़्त संगठनों की बात मान ली होती और एक बच्चे के उपर प्रश्न पत्र पर खर्च होने वाले 50 पैसे को तवज्जो न देते हुए विद्यार्थियों की चिंता की होती तो आज यह स्थिति पैदा न होती। बैठक में ज़ोर दिया गया की सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ मात्र साबित हुआ है क्योंकि सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी तैयारी पूरी कर चूके थे।पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि अभी हिमाचल में स्थिति नियंत्रण में थी और यहाँ के हालात उत्तर प्रदेश से बेहतर हैं और यदि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव व पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव जारी रह सकते हैं तो इन बच्चों की परीक्षाएँ क्यों नहीं। वैसे भी हर विद्यालय ने अपने स्तर पर सभी तैयारियाँ पूरी कर दी थी।एक ओर दसवीं की परीक्षाएँ ही नहीं हुई तो दूसरी ओर दाख़िला शुरू है। संघ बार-बार सरकार , शिक्षा विभाग व बोर्ड से आग्रह करता आया है कि ऐसे निर्णय लेने से पहले स्टेक होल्डर्ज़ से मशवरा लेना चाहिए जिसे लोगों में विश्वसनीयता बनी रहे।

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वीरेंद्र चौहान 

प्रदेशाध्यक्ष 

HGTU

Deepika Sharma

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