सम्पादकीय

असर संपादकीय: शहर के बीचो-बीच शमशान क्यों है —–डॉ एम डी सिंह 

----डॉ एम डी सिंह की कलम से

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जीना दूभर मरना आसान क्यों है

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हैरत में हैं सब फिर भी ख़ामोश क्यों

रात तो रात दिन भी वीरान क्यों है

 

रोज मिलता था कल तक जो बार-बार

वो जा रहा बगल से अनजान क्यों है

 

माथे पर शिकन आंखें ख़ौफ़जदा क्यों 

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आदमी इतना भी परेशान क्यों है

 

कब्र अपनी ही खोदने में लगा आज

कमबख्त दिख रहा इतना नादान क्यों है

 

 डॉ एम डी सिंह 

 महाराजगंज गाजीपुर उत्तर प्रदेश

 

Deepika Sharma

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