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असर विशेष: ज्ञान गंगा “लक्ष्मण -एक भाई, मित्र व सलाहकार” (भाग-२)”लक्ष्मण का श्रीराम को प्रोत्साहन”  

रिटायर्ड मेजर जनरल एके शौरी की कलम से...

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रिटायर्ड मेजर जनरल ऐके शौरी

 

वाल्मीकि रामायण में ऐसे कई प्रसंगों का उल्लेख है जब श्रीराम स्वंय को बहुत ही हताश, दुखी व उदास महसूस करते हैं। उनका मन बहुत ही निराश व दुखी हो चुका है। ऐसा तब होता है जब वो सीता की तलाश में लगे हुए हैं लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल रहा है। वे अपनी विवशता पर क्रोध भी कर रहे है और फिर सीता का ख्याल कर उदास भी हो जाते है। ऐसे समय में लक्ष्मण उनको सांत्वना भी देते हैं और पूरा ढाढ़स भी बंधाते हैं। लक्ष्मण उनके साथ एक छोटे भाई नहीं बल्कि दोस्त की भांति बर्ताव करते हैं। ऐसा विशेषतया तब होता है जब वाली के म्रत्यु के बाद मौसम बदल चुका होता है, सुग्रीव अपने राज्य में आनंद पूर्वक रह रहा है, मौज मस्ती में अपना समय बिता रहा है, जबकि श्रीराम लक्ष्मण संग मारे-मारे फिर रहे हैं, वनों में भटक रहे हैं। इस को वाल्मीकि रामायण में इस तरह से बताया गया है।

लक्ष्मण श्रीराम को संबोधित कर कहते है (अरण्यकाण्डसर्ग ६५,शलोक ४,५,१६) कि हे श्री राम, आप् तो अत्यंत नम्र, नियमों का पालन करने वाले और समस्त अच्छी वस्तुयों व जीवों के प्रति समर्पित हैं। आपको अपना स्वभाव नहीं छोड़ना चाहिये। आप इस समय गुस्से का शिकार हो कर उसके गुलाम बन रहे हो। जिस तरह से चन्द्रमा शीतलता देता है, सूर्य अपना तेज बिखेरता है,वायु की गति वातावरण में महसूस होती है, धरती अपनी सहनशीलता महसूस करवाती है ये सभी विशेषताएं आप में भी विधमान हैं। अगर आपको अपने चरित्र को दिखा कर, संधि व सुलह से, धैर्य व शान्ति से सीता प्राप्त न हो सके तो आप आपने शक्तिशाली बाणों से जो कि विष से बुझे हुए हैं, और इंद्र के वज्र से भी अधिक शक्तिशाली हैं, उनसे आप बेशक इस धरा का विनाश कर देना।

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अगर आप इस विपदा को सहार नहीं पा रहे हो, जो कि इस समय आप पर आयी हुयी है, तो फिर ऐसा कौन होगा जो इस को सहार सके जो कि एक आम इंसान है और जिसमें शक्ति व सामर्थ्य भी बहुत कम होता है। इसलिए, दिल न छोड़ें और स्वंय को मज़बूत करें। ऐसा कौन सा इंसान है जिस पर विपतियाँ नहीं आती? वे तो आग के शोलों की तरह आती हैं और फिर जल्द ही बुझ भी जाती हैं। अगर, इस प्रकार आप् चोट खा लें, जिसमें तीनो लोक को स्वंय में समा लेने की शक्ति है, हे शूरवीर, तो ऐसे में आम मानवजन जब तकलीफ में आयेंगे, तो उन्हें चैन कहाँ से और कैसे मिलेगा? जब समय की मार पड़ती है तो उस से तो बड़े से बड़े मानव तो क्या देवता भी नहीं बच सकते। धर्म व अधर्म, इन दोनों की पालना से इनके फलस्वरूप फल (खुशी और दुःख) सभी को प्राप्त होते हैं, चाहे वो इंद्र हो अथवा अन्य कोई भी देवता। आप जैसे महान हो, आप अपनी दिव्य द्रिष्टी से सब कुछ देख लेने की शक्ति रखते हो। आप बड़े से बड़े दुःख में भी डगमगाते नहीं हो बल्कि अपने चेहरे पर ऐसा कुछ भाव भी नहीं आने देते। तर्क की कसौटी पर उचित व अनुचित के मध्य अंतर करें। इस तर्क की ही सहायता से बुद्धिमान लोग उचित-अनुचित का अंतर करने में सक्षम होते हैं। ऐसे कार्य जिनके गुण व दोष देखे न गये हों (सिवाय धर्मग्रंथों के अनुसार) और जो हमेशा के लिए स्थिर भी नहीं होते (और जो अपना कार्य कर के समाप्त भी हो जाते हैं) बिना व्यकतिगत चेष्टा व मेहनत के सफल भी नहीं हो सकते। आपके ज्ञान व बुद्धिमता को देवता भी नकार नहीं सकते, मैं तो मात्र आपकी सोयी हुयी विशेश्तायों व समझदारी को जगाने की कोशिश मात्र ही कर रहा हूँ, जिसके उपर शोक का जंग लग गया है। (सर्ग ७६,शलोक ५,६,७,१२,१३,१५,१६,१७,१९)

लक्ष्मण जी अपनी बात को विस्तार से बताने के साथ ही श्रीराम को उनके कर्तव्य के बारे में भी याद दिलाते हैं जिसका उल्लेख किष्किन्धा कांड सर्ग २७, शलोक ३४,३५,३६,३७,३८,३९ में इस प्रकार किया गया है। लक्ष्मण कहते हैं कि श्रीराम अपने दुःख व क्षोभ को अभी ही त्याग दें। हे राजन, आपको दुखी होना शोभा नहीं देता। आपको तो भली-भांति ज्ञात है कि एक शोकग्रस्त अपने लक्ष्य से कैसे व कितनी जल्द भटक जाता है। आप अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित हो।आप अपना समय ईश्वर आराधना में भी अच्छी तरह से लगाते हो, आप भगवान् के तथा दूसरी दुनिया के अस्तित्व में भी पूर्णतया विश्वास रखते हो। आप तो अपने आचरण व स्वभाव से भी पवित्र और स्फूर्ति से भरपूर हो। हे रघु के वंशज इस तरह हताश व निराश बैठे रहने से आप अपने उस शत्रु, दुष्ट असुर रावण को कभी भी मार नहीं सकोगे जो कि मायावी भी है। अपने आप को हमेशा के लिए इस निराशा के सागर से बाहर निकालिय और निशचय करें कि उस असुर व उसके समस्त परिवार का खात्मा करना है.।आप में इतनी शक्ति है कि आप इस धरा को इसके समस्त समुंद्र, जंगल व पर्वतों समेत उलटा-पुल्टा कर सको, रावण आपके सामने फिर चीज़ ही क्या है। वर्षा ऋतू अभी अभी समाप्त हुयी है, शरद के आने की प्रतीक्षा करें। समय आने पर आप रावण, उसके राज्य व उसकी सेना का नाश करेंगे।

Deepika Sharma

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