संस्कृति

युवा पीढ़ी में मातृ भाषा के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए कार्यक्रम

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भाषा एवम संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश जिला शिमला द्वारा ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’के अंतर्गत पहाड़ी बोली के उन्नयन हेतु युवा पीढ़ी में मातृ भाषा के प्रति जागरूकता पैदा करने तथा विलुप्त होती पहाड़ी बोली के महत्व को बनाएं रखने के उद्देश्य से आज राजकीय अटल बिहारी वाजपेई इंजीनियरिंग एवम तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान प्रगति नगर गुम्मा में पहाड़ी बोली पर भाषण, कविता लेखन व पाठन , लोककोक्ति, पहलियां, मुहावरा, लुप्त प्रायशब्द आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया गया। इन प्रतियोगिताओं में इस संस्थान के विभिन्न संकायों के डेढ़ दर्जन से अधिक प्रशिक्षणार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। भाषण प्रतियोगिता में ड्राफ्ट्समैन सिविल ट्रेड की तमन्ना ने प्रथम, एमएमवी ट्रेड के लोकेश ने द्वितीय, अक्षय ड्राफ्टमैन सिविल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कविता लेखन में जहान्वी बीटेक, प्रथम, यंकिश ड्राफ्ट्समैन सिविल ट्रेड दूसरा, अजय ड्राफ्ट्समैन सिविल ट्रेड ने तीसरा, लोकोक्ति / मुहावरा प्रतियोगिता में सुजाता बीटेक प्रथम, बीटेक के ही सिमरन ओर दीक्षा , गौरव ने दूसरा, अभिषेक ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पहेली प्रतियोगिता में अजय ड्राफ्ट्समैन सिविल ट्रेड व अन्वी शर्मा ने भाग लिया। लुप्त शब्द प्रतियोगिता में बीटेक के निखिल चौधरी, और अक्षिता ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ इस संस्थान के निदेशक एवम प्राचार्य एसएन सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने इन प्रतियोगिताओं के संस्थान में आयोजित करने व पहाड़ी बोली के विकास एवम युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से उठाए जा रहे कदमों की भूरी भूरी प्रशंशा की। अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार पहाड़ी भूप रंजन, पहाड़ी गजलकार नरेश देयोग, लोकगायक प्रवेश निहल्टा ने निर्णायक की भूमिका में शिरकत की तथा पूर्व सद्स्य अकादमी व वरिष्ठ साहित्यकार भूप रंजन ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि विलुप्त होती पहाड़ी शब्दावली को बचाए रखने के लिए युवा पीढ़ी को पहाड़ी के लेखन व पठन को अपने व्यवहार में लाकर दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए आगे आने का आहवान किया। लोकगायक प्रवेश निहल्टा ने लुप्त हो रही पहाड़ी लोक संस्कृति के विकास के लिए पारंपरिक लोक गीतों व लोक वाद्ययंत्रों को प्राथमिकता देनी होगी। ताकि युवा पीढ़ी को समृद्ध संस्कृति की विशेषता बारे भी ज्ञानवर्धन हो सके। सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद जिला भाषा अधिकारी अनिल कुमार हारटा ने किया। अवसर पर अधीक्षक श्री पदम सिंह, अंशिका सलारिया असिस्टेंट प्रोफेसर, आकांक्षा शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर ,नूतन चौहान असिस्टेंट प्रोफेसर ,गोपाल चंद कार्यशाला अनुदेशक ,राजेंद्र चौहान अनुदेशक ड्राफ्ट्समैन सिविल, तपेंद्र सिंह अनुदेशक इलेक्ट्रिकल ,ज्ञानचंद अनुदेशक मोटर मैकेनिक ,विनय भारद्वाज अनुदेशक और अन्य स्टाफ भी उपस्थित थे

Deepika Sharma

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