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आज जाति के नाम पर ध्रुवीकरण किया जा रहा

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दलित शोषण मुक्ति मंच का राज्य स्तरीय सेमिनार भारतीय संविधान और मनुस्मृति की चुनौतियों के विषय पर शिमला के कालीबाड़ी हॉल में सम्पन हुआ। मंच की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवम पूर्व सांसद सुभाषणी अली ने सेमिनार को संबोधित किया। सेमिनार में राज्य संयोजक जगत राम,सह संयोजक आशीष पंवर,शिमला शहरी संयोजक विवेक कश्यप,जिला सह संयोजक सुरेंद्र तनवर,हिमाचल प्रदेश सरकार के पूर्व गृह सचिव कश्मीर चंद,नरेंद्र विरुद्ध,अर्जुन सिंह,प्रताप चंद,रविकांत,अमर चंद गजपति,किशोरी लाल,नैन सिंह,राजकुमार,ओंकार शाद,कुलदीप तनवर,संजय चौहान,प्रेम गौतम,विजेंद्र मेहरा,फालमा चौहान,राकेश कुमार,बालक राम,अमित ठाकुर सहित हिमाचल प्रदेश के 11 जिलों से 300 के करीब लोगों ने भाग लिया।

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सेमिनार को सम्बोधित करते हुए सुभाषिनी अली ने बताया कि आज देश के अंदर जो संविधान पर हमले हो रहे है उससे हिमाचल प्रदेश भी अछूता नही है। आज देश के अन्दर मनुवाद के विचार को ले कर आगे बढ़ रही है जिसके लिए सरकार आज संविधान को दर किनार कर रही है। सुभाषिनी अली के कहा कि आज देश मे जंहा एक तरफ आरक्षण को खत्म करने और एट्रोसिटी एक्ट को खत्म करने की बात हो रही है वंही आज भी देश मे किसी की हत्या हो जाती है तो सबसे पहले मरने वालों और मारने वालों की जाति पूछी जाती है और उसके आधार पर कानून व्यवस्था इस आधार पर काम करती है। उन्होंने संविधान के मूल्यों की रक्षा करने,संविधान की प्रस्तावना को सभी कार्यालयों में स्थापित करने,दलितों पर बढ़ते हमलों को रोकने,अनुसूचित जाति,जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून को सख्ती से लागू करने,निजी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था लागू करने,सरकारी नौकरियों में नियमित भर्तियां करने व आरक्षण व्यवस्था लागू करने,दलितों के रिक्त पदों को तुरन्त भरने तथा अनुसूचित जाति,जनजाति उप योजना के बजट को दलितों के विकास के लिए खर्च करने व इसके दुरुपयोग को रोकने आदि मुद्दों पर बात रखी।

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उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज संविधान को चुनौती देते हुए एक तबका सरेआम आरक्षण व अनुसूचित जाति,जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून की शवयात्रा निकाल रहा है व सरकार द्वारा इसकी इज़ाज़त देकर संविधान की हत्या कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में देश व प्रदेश में दलितों का उत्पीड़न बढ़ा है। उन पर शारीरिक हमले बढ़े हैं। उनकी हत्याएं तक हुई हैं। इस दौर में अनुसूचित जाति,जनजाति उत्पीड़न रोकथाम कानून को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता थी परन्तु इस कानून को सरकार ने कमज़ोर करने की निरन्तर कोशिश की है। हिमाचल प्रदेश में भी दलितों पर उत्पीड़न व हमलों की घटनाओं में भारी इज़ाफ़ा हुआ है। प्रदेश सरकार इन हमलों व उत्पीड़न पर खामोश रही है। हिमाचल प्रदेश के अन्दर जंहा आज जाति के नाम पर ध्रुवीकरण किया जा रहा है उसके लिए हिमाचल सरकार जिमेवार है क्योंकि या तो सरकार स्थिति को संभाल नही पा रही है या फिर अपनी नाकामियां छुपाने के लिए ये सब कर रही है।

 

इसके अलावा सेमिनार को दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक जगत राम एवं सह संयोजक आशीष कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि आज हिमाचल प्रदेश दलित उत्पीड़न का केंद्र बना हुआ है। जंहा एक और दलित वर्ग कानून में प्रावधनों को लागु करवाने के लिए भी सड़कों पर उतरना पड़ता है वंही दूसरी तरफ उत्पीडन और शोषण को संस्थागत बनाने के लिए आरएसएस के अजेंडा पर कुछ लोग आंदोलन कर रहे है। जगत राम एवम आशीष कुमार ने बताया कि आने वाले तीन महीनों में घर घर जा कर अभियान चलाया जाएगा और सामाजिक एकता को कायम रखते हुए सबको शिक्षा और रोजगार की मांग की जाएगी।

 

 

Deepika Sharma

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