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पीएम श्री स्कूलों में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर फोकस

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*HIPA में SNA-SPARSH का प्रशिक्षण, शिमला और किन्नौर के 40 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा*

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*शिमला।*
पीएम श्री स्कूलों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली धनराशि का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा ने शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPA), फेयरलॉन्स में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें शिमला और किन्नौर जिलों पीएम श्री स्कूलों के प्रभारी, डाइट के लेखा अधिकारी, समग्र शिक्षा के वित्त संबंधी अधिकारी सहित 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला में समग्र शिक्षा के एसीओ राकेश कुमार, राज्य समन्वयक सोनिया शर्मा, पीएम श्री के स्टेट कोर्डिनेटर रविंद्र शर्मा, कटिना स्किल्स प्राइवेट लिमिटेड के होपिंग माइंड्स वेंचर के निदेशक (विशेष परियोजनाएं) अक्षय भारद्वाज, हिमाचल प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवाओं के आर.बी. गिरी सहित समग्र शिक्षा और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर प्रशिक्षण के दौरान पूर्व सलाहकार, एचपी-पीईआरसी और सेवानिवृत्त नियंत्रक (वित्त एवं लेखा) GC Raita ने SNA-SPARSH प्रणाली की कार्यप्रणाली और वित्तीय जवाबदेही के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकारी धनराशि किस तरह स्वीकृति से लेकर अंतिम भुगतान तक पहुंचती है। इसमें ट्रेजरी सिंगल अकाउंट व्यवस्था, जरूरत के अनुसार समय पर धन जारी करना, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS), राज्य के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सिस्टम (IFMIS) और भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर (e-Kuber) की भूमिका समझाई गई। इसके साथ ही मेकर (Maker), चेकर (Checker) और आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) की जिम्मेदारियों, तकनीकी समस्याओं के समाधान, वित्तीय जांच (ऑडिट) की तैयारी और डिजिटल रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।

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इस अवसर पर समग्र शिक्षा की राज्य समन्वयक सोनिया शर्मा ने कहा कि पीएम श्री स्कूलों को भवनों, प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं और स्कूलों के विकास के लिए अलग-अलग मदों में अनुदान दिया जाता है। इन कार्यों में कई विक्रेताओं को भुगतान करना होता है और राशि भी अधिक होती है। इसलिए भुगतान का सही हिसाब रखना और समय पर भुगतान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित कर्मचारी धनराशि का निर्धारित मदों में सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय रिकॉर्ड को जांच (ऑडिट) के लिए तैयार रख सकेंगे। इससे स्कूलों में विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी।

*हिमकोष (Himkosh) पोर्टल पर काम करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण*
कार्यशाला में हिमकोष (Himkosh) पोर्टल पर काम करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एसएनए कोड का चयन, एजेंसी कोड के माध्यम से विक्रेताओं का पंजीकरण और जीएसटी, पैन, बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड तथा पते जैसी जानकारियां दर्ज करना शामिल रहा। प्रतिभागियों को योजना और बजट मद के अनुसार बिल तैयार करने, संबंधित विक्रेता का चयन करने और बिल जमा करने से पहले सभी जानकारियों की जांच करने का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को भुगतान की स्थिति देखने, आरटीजीएस/यूटीआर संदर्भ संख्या दर्ज करने, स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड का पोर्टल से मिलान करने, उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilisation Certificate) तैयार करने और डैशबोर्ड पर उपलब्ध जानकारी देखने का अभ्यास भी कराया गया। इस कार्यक्रम के तहत आगे प्रदेश के शेष 10 जिलों के 184 प्रतिभागियों को चयनित आठ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

Deepika Sharma

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