नवाचार, अनुसंधान और व्यावहारिक शिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को सशक्त बना रहा एपीजी शिमला विश्वविद्यालय

शिमला, 13 अक्टूबर 2026:
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में “Teaching-Learning and Research: Practical Applications” विषय पर एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आज विश्वविद्यालय परिसर में शुभारंभ हुआ। 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किए जा रहे इस छह दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की शिक्षण क्षमताओं, अनुसंधान कौशल, नवाचार क्षमता तथा उच्च शिक्षा में व्यावहारिक अकादमिक अनुप्रयोगों को और अधिक सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य प्रो. ममता मोक्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. देविंदर शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य अकादमिक सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. ममता मोक्ता ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सही दिशा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से नवाचार को अपनाने, निरंतर अपने ज्ञान को अद्यतन करने तथा ऐसी विशेषज्ञता विकसित करने का आह्वान किया, जिससे वे विद्यार्थियों के लिए प्रभावी मार्गदर्शक और समाज के लिए उपयोगी पेशेवर बन सकें।
प्रो. मोक्ता ने कहा कि व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत विकास के लिए सही दिशा और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से अपने कौशल को निरंतर विकसित करने तथा शिक्षण में नए और रचनात्मक तरीकों को अपनाने का आग्रह किया, ताकि विद्यार्थी और समाज किसी भी चुनौती के समाधान के लिए शिक्षकों की ओर विश्वास के साथ देख सकें। उन्होंने एक ऐसे शिक्षण वातावरण के निर्माण पर भी जोर दिया, जो विद्यार्थियों को उभरती हुई चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए तैयार करे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं डीन फैकल्टी, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय, ने शिक्षण एवं अकादमिक जीवन में प्रभावी संचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेहतर संवाद शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ने में मदद करता है और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाता है। उन्होंने उच्च शिक्षा में नए नवाचारों और अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कुलपति प्रो. डॉ. देविंदर शर्मा ने कहा कि फैकल्टी डेवलपमेंट केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से निरंतर अनुसंधान अभिविन्यास, नवाचारपूर्ण सोच और व्यावसायिक अनुभव विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों के पास मजबूत अनुसंधान क्षमता, नवाचार की समझ और व्यापक व्यावसायिक अनुभव होता है, वे विद्यार्थियों का बेहतर मार्गदर्शन कर उन्हें सफल अकादमिक एवं व्यावसायिक करियर के लिए तैयार कर सकते हैं।
इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, मीडिया विशेषज्ञों और विषय विशेषज्ञों को बतौर रिसोर्स पर्सन शामिल किया गया है। कार्यक्रम के प्रमुख रिसोर्स पर्सन्स में प्रो. डॉ. हरीश ठाकुर, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय; प्रो. डॉ. राजकुमार सिंह, वाणिज्य विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं मुख्य संपादक, Indian Journal of Finance; प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं डीन फैकल्टी, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय; डॉ. महेश शर्मा (UIT), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला तथा सुश्री दीक्षा शर्मा, कम्युनिकेशन एवं पर्सनैलिटी कोच, संस्थापक, OneUp Learning एवं प्रिंसिपल/मनोवैज्ञानिक शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षण-अधिगम, अनुसंधान, संचार, नवाचार, व्यावसायिक विकास तथा उच्च शिक्षा में व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। FDP का उद्देश्य शिक्षकों को अकादमिक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा समकालीन शिक्षण एवं अनुसंधान पद्धतियों से परिचित होने के अवसर प्रदान करना है।
उद्घाटन सत्र के अंत में प्रो. आनंद मोहन, डीन अकादमिक्स, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, कुलपति, रिसोर्स पर्सन्स तथा सभी शिक्षक सदस्यों का कार्यक्रम में उपस्थिति एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की शिक्षक विकास, अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-अधिगम को बढ़ावा देने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक एवं व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप सक्षम बनाना तथा उन्हें नई पीढ़ी के विद्यार्थियों का प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन एवं सशक्तिकरण करने के लिए तैयार करना है।



