असर विशेष: शिमला की चढ़ाइयों पर खाकी वर्दी में उम्मीद बांटती हैं स्वाति धीमान, मेहनत और जज्बे की मिसाल बनीं महिला डाककर्मी
कठिन रास्ते, बदलता मौसम और चेहरे पर मुस्कान… हर घर तक चिट्ठियां और खुशियां पहुंचाना है स्वाति का जुनून
शिमला। पहाड़ों की कठिन चढ़ाइयां, पथरीले रास्ते और मौसम की चुनौतियां भी जब हौसले के आगे छोटी पड़ जाएं, तो एक प्रेरक कहानी जन्म लेती है। राजधानी शिमला में खाकी वर्दी पहने महिला डाककर्मी स्वाति धीमान रोजाना कुछ ऐसी ही मिसाल पेश कर रही हैं। भारतीय डाक विभाग में कार्यरत स्वाति अपनी मेहनत, लगन और मुस्कान के साथ लोगों के घरों तक चिट्ठियां, पार्सल और जरूरी दस्तावेज पहुंचा रही हैं।
आमतौर पर पुरुषों की अधिक भागीदारी वाले इस कार्यक्षेत्र में स्वाति ने अपनी अलग पहचान बनाई है। शिमला के ऊंचे-नीचे रास्तों पर चलते हुए वह न केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही हैं।
स्वाति के लिए डाक पहुंचाना महज नौकरी नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ने और उनकी खुशियों का हिस्सा बनने का जरिया है। किसी बुजुर्ग के जरूरी दस्तावेज हों या किसी युवा का इंटरव्यू लेटर, डाक के हर लिफाफे के साथ किसी की उम्मीद जुड़ी होती है। यही वजह है कि उनके पहुंचने पर लोग उनका स्वागत परिवार के सदस्य की तरह करते हैं।
अपने अनुभव साझा करते हुए स्वाति धीमान बताती हैं कि शुरुआत में शिमला की चढ़ाइयों और बदलते मौसम के बीच काम करना चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन जब किसी के चेहरे पर चिट्ठी या पार्सल पाकर खुशी दिखाई देती है, तो सारी थकान दूर हो जाती है। उन्हें गर्व है कि वह भारतीय डाक विभाग का हिस्सा बनकर लोगों की सेवा कर रही हैं।
स्वाति की कहानी उन युवतियों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं। उनका संदेश भी बेहद स्पष्ट है—“बेटियों को मौका दीजिए, वे रास्ते खुद बना लेंगी।”
शिमला की वादियों में घर-घर डाक पहुंचाती स्वाति धीमान साबित कर रही हैं कि आत्मविश्वास, मेहनत और जिम्मेदारी के साथ कोई भी महिला हर चुनौती का सामना कर सकती है।
रिपोर्ट: जसवीर सूद (डिम्पल)

