मानसिक दबाव एवं अनिश्चित कैरियर से चिकित्सकों में बढ़ रही असुरक्षा,
HMOA ने सरकार से पारदर्शी भर्ती एवं समयबद्ध कैरियर प्रगति की मांग की

शिमला, सितंबर 2026:
हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति (CEC) की बैठक में प्रदेश के चिकित्सकों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में विशेष रूप से राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों को अस्थायी व्यवस्था (Stop-Gap Arrangement) के अंतर्गत Assistant Professor के रूप में Designation/Posting दिए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
एसोसिएशन के अनुसार बार-बार की जा रही अस्थायी नियुक्तियों, वरिष्ठता एवं पात्रता को लेकर अस्पष्टता, कैडर संबंधी अनिश्चितता तथा नियमित एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के अभाव से चिकित्सकों में मानसिक दबाव, असुरक्षा तथा भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। इससे विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों के मनोबल एवं दीर्घकालिक कैरियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और सरकारी सेवा से चिकित्सकों के विमुख होने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
HMOA ने मांग की है कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों को बार-बार अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से भरने के बजाय नियमित भर्ती, विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) तथा संबंधित आयोग के माध्यम से पारदर्शी, समान, वरिष्ठता एवं पात्रता आधारित प्रक्रिया अपनाई जाए।
विशेषज्ञ प्रशिक्षण एवं Senior Residency पूर्ण कर चुके पात्र चिकित्सकों को निर्धारित भर्ती एवं DPC प्रक्रिया के माध्यम से नियमित नियुक्ति अथवा पदोन्नति के समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। यदि प्रशासनिक आवश्यकता के कारण अस्थायी व्यवस्था आवश्यक हो, तो उसे केवल सीमित अवधि के लिए रखा जाए तथा इसे नियमित नियुक्ति या पदोन्नति का विकल्प न बनाया जाए।
बैठक में DHS-DME Cadre विवाद एवं लंबित न्यायिक कार्यवाही पर भी चर्चा की गई। एसोसिएशन ने मांग की कि भविष्य की प्रशासनिक कार्रवाई ऐसी हो जिससे समान स्थिति वाले चिकित्सकों की वरिष्ठता, कैडर अधिकार एवं कैरियर प्रगति प्रभावित न हो। साथ ही पूर्व एवं वर्तमान सरकारी सूचियों में प्रभावित चिकित्सकों की स्थिति को स्पष्ट किया जाए।
चिकित्सा अधिकारियों के लिए DACPS/MACPS की मांग
HMOA ने चिकित्सा अधिकारियों के लिए लंबे समय से लंबित Dynamic Assured Career Progression Scheme (DACPS/MACPS) लागू करने की मांग को भी दोहराया।
एसोसिएशन के अनुसार Central Health Services में वर्ष 2008 में Medical Officers के लिए Dynamic Career Progression का प्रावधान किया गया था तथा बाद में कई राज्यों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की गई। हिमाचल प्रदेश में Medical Officers के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित होने के कारण लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अनेक चिकित्सकों को अपेक्षित कैरियर प्रगति नहीं मिल पाती है।
इसलिए सरकार से मांग की गई है कि हिमाचल प्रदेश में Medical Officers के लिए समयबद्ध DACPS/MACPS अथवा समान रूप से प्रभावी कैरियर प्रगति योजना लागू करने पर तत्काल विचार किया जाए।
बैठक में चिकित्सकों के लिए NPA, चिकित्सकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों एवं अन्य कर्मचारियों की कमी तथा DHS/DME Cadre से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई। NPA के विषय को Veterinary, Dental, AYUSH एवं Faculty Associations के साथ संयुक्त रूप से सरकार के समक्ष उठाने का निर्णय लिया गया।
HMOA ने सभी जिला इकाइयों से उन स्वास्थ्य संस्थानों की सूची उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है, जहां चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ की गंभीर कमी तथा सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि इन समस्याओं को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
HMOA की प्रमुख मांगें
1. राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शैक्षणिक पदों पर पारदर्शी एवं नियमित भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
2. DHS-DME विवाद के बीच चिकित्सकों की वरिष्ठता एवं कैडर अधिकारों की रक्षा की जाए।
3. पूर्व एवं वर्तमान सरकारी सूचियों में प्रभावित चिकित्सकों की स्थिति स्पष्ट की जाए।
4. Medical Officers के लिए DACPS/MACPS अथवा समान समयबद्ध कैरियर प्रगति योजना लागू की जाए।
5. सभी पात्र चिकित्सकों के लिए निष्पक्ष, समान एवं न्यायसंगत कैरियर प्रगति सुनिश्चित की जाए।
6. चिकित्सकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों तथा अन्य स्टाफ की कमी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।
HMOA ने स्पष्ट किया कि इन मांगों का उद्देश्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सेवाओं को बाधित करना नहीं है, बल्कि चिकित्सकों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी, सम्मानजनक एवं दीर्घकालिक सेवा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि चिकित्सकों को मानसिक दबाव एवं अनिश्चितता की स्थिति में रखने के बजाय उनकी सेवा शर्तों, वरिष्ठता, कैडर अधिकारों एवं कैरियर प्रगति से संबंधित विषयों पर शीघ्र, स्पष्ट एवं न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।



