EXCLUSIVE: दो दशक बाद फिर दिखा जंगलों का ‘खामोश पहरेदार
डालहौजी में दुर्लभ हिमालयन सीरो कैमरे में कैद
चंबा। घने जंगलों की खामोशी के बीच करीब दो दशक से गायब चल रहा हिमालय का बेहद दुर्लभ वन्यजीव हिमालयन सीरो एक बार फिर नजर आया है। डलहौजी के कैचमेंट जंगलों में इस रहस्यमयी वन्यजीव की मौजूदगी कैमरे में कैद होने से वन्यजीव प्रेमियों के चेहरे खिल उठे हैं। खास बात यह है कि यह क्षेत्र कालाटोप-खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य से सटा हुआ है।
वन विभाग की टीम को नियमित गश्त के दौरान जंगल में सीरो दिखाई दिया। देखते ही देखते इसकी तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड कर ली गई। डलहौजी के कैचमेंट वन क्षेत्र में सीरो की यह पहली पुष्ट कैमरा रिकॉर्डिंग मानी जा रही है। करीब 20 साल बाद सामने आए इस दुर्लभ वन्यजीव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चंबा के जंगल आज भी कई अनदेखे वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना हैं।
2005-06 के बाद नहीं मिला था कोई पुख्ता सुराग
हिमालयन सीरो बेहद शर्मीला और एकांतप्रिय वन्यजीव है, जो घने जंगलों और खड़ी पहाड़ी ढलानों में रहना पसंद करता है। यही वजह है कि इसका खुले तौर पर नजर आना बेहद दुर्लभ माना जाता है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार कालाटोप क्षेत्र में इसकी मौजूदगी आखिरी बार 2005-06के दौरान दर्ज हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक इसके कोई पुख्ता संकेत नहीं मिले।
अब दो दशक बाद उसी इलाके से इसकी मौजूदगी की खबर सामने आने से वन विभाग भी उत्साहित है। माना जा रहा है कि क्षेत्र का प्राकृतिक आवास अभी भी इस दुर्लभ प्रजाति के लिए अनुकूल बना हुआ है।
जंगल में छिपा था दुर्लभ वन्यजीवों का यह रहस्य
हिमालयन सीरो की वापसी सिर्फ एक वन्यजीव के दिखाई देने की खबर नहीं, बल्कि चंबा के जंगलों की समृद्ध जैव विविधता का भी संकेत है। वन विभाग अब ऐसे क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप और अन्य माध्यमों से निगरानी बढ़ाकर सीरो की मौजूदगी और संख्या का पता लगाने की तैयारी में है।
करीब दो दशक तक जंगल की नजरों से ओझल रहने के बाद कैमरे में कैद हुआ यह ‘खामोश पहरेदार’ फिलहाल डालहौजी के जंगलों में वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है।
कुलदीप सिंह जमवाल डीएफओ चंबा के मुताबिक डालहौजी के कैचमेंट क्षेत्र में हिमालयन सीरो की उपस्थिति वन विभाग के लिए उत्साहजनक संकेत है।


