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ख़ास ख़बर : शिमला में फूड टेस्टिंग लैब होगी स्थापित

"ईट राइट स्कूल" पहल के तहत विद्यालयों में नियमित निरीक्षण एवं खाद्य नमूनों की जांच पर विशेष बल दिया जाए

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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की 10वीं बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पूर्व बैठक की कार्यवाही की पुष्टि करते हुए विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर विभाग द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की गई।

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उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला में खाद्य व्यवसाय संचालकों को लाइसेंस एवं पंजीकरण जारी करने की प्रक्रिया निरंतर जारी है तथा सभी पात्र प्रतिष्ठानों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 800 पंजीकरण और 65 लाइसेंस जारी किये जा चुके हैं। इसके अलावा इस वित्तीय वर्ष में अब तक 172 पंजीकरण हुए हैं जिसमे से 67 लाइसेंस जारी किये गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लाइसेंस एवं पंजीकरण की शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करें। 

मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (एमएफटीएल) के माध्यम से खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। समिति ने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा खाद्य व्यवसाय संचालकों को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए। वर्तमान में जिला में विश्लेषक की अनुपलब्धता के कारण मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के माध्यम से नमूनों का परीक्षण नहीं हो पा रहा है।

उपायुक्त ने कहा कि “ईट राइट स्कूल” पहल के तहत विद्यालयों में नियमित निरीक्षण एवं खाद्य नमूनों की जांच पर विशेष बल दिया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्कूल परिसरों के आसपास बिकने वाले खाद्य पदार्थों, विशेषकर कुल्फी, चुस्की, आइसक्रीम तथा अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

इसके अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत लिए गए कानूनी एवं प्रवर्तन नमूनों की भी समीक्षा की गई। 28 सैंपल शिमला ग्रामीण के दायरे से एकत्रित किए गए हैं। जिला में विभिन्न खाद्य पदार्थों के प्रवर्तन एवं निगरानी नमूने लिए गए हैं तथा अधिकांश नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। अधिकारियों को होटलों, रेस्तरां, ढाबों तथा अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण करने तथा खाद्य गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न होने देने के निर्देश दिए गए।

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उपायुक्त ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जन-जागरूकता, नियमित निरीक्षण तथा प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से जिला में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आम जन भी पौष्टिक खाद्य सामग्री का इस्तेमाल अपने जीवन में करें। स्वस्थ आहार ही स्वस्थ जीवन को मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा जंक फूड का परहेज करना चाहिए और बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की खाद्य सामग्री की आदत डालें।

 

*शिमला में फूड टेस्टिंग लैब होगी स्थापित*

शिमला शहर के साथ लगते क्षेत्र शोघी में फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी। इसके लिए वहां पर सरकारी भवन का निरीक्षण कर विभाग अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद ही यहां पर लैब स्थापित होगी। इसके निर्माण से खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम रखा जायेगा। यह आधुनिक प्रयोगशाला खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, शुद्धता और सुरक्षा की वैज्ञानिक जांच करेगी। यहां दूध, घी, तेल, मसाले, मिठाइयों, पेय पदार्थों तथा अन्य खाद्य उत्पादों में मिलावट, कीटनाशकों के अवशेष, हानिकारक रसायनों, भारी धातुओं और सूक्ष्म जीवों की जांच की जाएगी। साथ ही, खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य, गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने का परीक्षण भी किया जाएगा। इस लैब से स्थानीय खाद्य उत्पादकों, होटल-रेस्तरां, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित करने में सुविधा मिलेगी। फूड टेस्टिंग लैब मिलावटी खाद्य पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानकों के प्रभावी अनुपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ये रहे मौजूद

बैठक में सचिन शर्मा अतिरिक्त जिलाधीश, जगदीश शर्मा जिला पर्यटन विकास अधिकारी, लेख राज भारद्वाज उप निदेशक माध्यमिक शिक्षा,  डॉ. विनीत लखनपाल जिला कार्यक्रम अधिकारी, ममता पॉल जिला कार्यक्रम अधिकारी ( महिला बाल कल्याण), धर्मेंद्र चौहान सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा शिमला ग्रामीण, डॉ विजय नेगी सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा नगर निगम शिमला, अनीता ठाकुर खाद्य सुरक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Deepika Sharma

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