30 वर्षों की निष्कलंक सेवा: एएसपी नरवीर सिंह राठौर ने पुलिस सेवा में रचा उत्कृष्टता का इतिहास

शिमला, 15 जुलाई।
हिमाचल प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एवं वर्तमान में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (SIU) में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Additional SP) नरवीर सिंह राठौर ने 15 जुलाई 2026 को हिमाचल प्रदेश पुलिस में अपनी 30 वर्षों की उत्कृष्ट, समर्पित और निष्कलंक सेवा सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है। वर्ष 2033 में सेवानिवृत्ति तक वह अपनी सेवाएं विभाग को देते रहेंगे।
नरवीर सिंह राठौर ने 15 जुलाई 1996 को धर्मशाला (जिला कांगड़ा) से अपने पुलिस करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, पालमपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहां उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्मॉल आर्म्स फायरिंग (शूटिंग) में प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) से कमांडो प्रशिक्षण तथा राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद से कॉम्बैट टैक्टिक्स और डेडली वेपन हैंडलिंग का उन्नत प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
सेवा के शुरुआती 12 वर्षों में उन्होंने पालमपुर, नालागढ़, कसौली, नाहन, पांवटा साहिब, धर्मशाला और सोलन सहित विभिन्न पुलिस थानों में थाना प्रभारी (एसएचओ) एवं अन्वेषण अधिकारी के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने बैंक डकैती, हत्या, दुष्कर्म, लूट, आर्थिक अपराधों सहित अनेक संगीन मामलों की जांच की। अपने अब तक के सेवा काल में उन्होंने करीब 4,000 आपराधिक मामलों की जांच और पर्यवेक्षण करते हुए आरोपियों के विरुद्ध सक्षम न्यायालयों में प्रभावी चालान प्रस्तुत किए।
जुलाई 2008 में उन्हें उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर पदोन्नत किया गया। वर्ष 2008 से 2018 के बीच उन्होंने डीएसपी मुख्यालय सोलन तथा परवाणू, पांवटा साहिब, नाहन और दाड़लाघाट में एसडीपीओ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
जिला पुलिस में लंबे समय तक अन्वेषण संबंधी जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पेशेवर जांच के लिए विशेष पहचान बनाई। उनके द्वारा जांचे गए लगभग दो दर्जन चर्चित मामलों में अदालतों ने आरोपियों को दोषी करार दिया। इनमें से एक दर्जन से अधिक मामलों में दोषियों को 10 वर्ष से अधिक अथवा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि कई मामलों में भारी आर्थिक दंड भी लगाया गया।
वर्ष 2020 में उन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Additional SP) पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद उन्होंने लगभग चार वर्षों तक शिमला स्थित साइबर क्राइम विंग में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा साइबर ठगी के पीड़ितों को करोड़ों रुपये की राशि वापस दिलाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। साइबर अपराधों की जांच और पुलिसिंग में उनके उत्कृष्ट कार्यों के चलते हिमाचल प्रदेश पुलिस को प्रतिष्ठित SKOCH Award भी प्राप्त हुआ।
वर्तमान में वह राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट में तैनात हैं, जहां वे भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों और अन्य संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे हैं तथा कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच सफलतापूर्वक पूरी कर चुके हैं।
उनकी उत्कृष्ट जांच क्षमता और विशिष्ट सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने वर्ष 2022 में उन्हें “मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन” से सम्मानित किया। यह सम्मान आपराधिक जांच के क्षेत्र में देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है।
पुलिस सेवा के 30 वर्ष पूर्ण करने के इस गौरवपूर्ण अवसर पर हिमाचल प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों, मित्रों और आम नागरिकों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल सेवाकाल की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे वर्ष 2033 तक अपनी ईमानदारी, निष्पक्षता, कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ प्रदेश और समाज की सेवा करते रहेंगे।


