RDG समाप्ति से प्रदेश पर संकट, लंबित देनदारियों को लेकर बढ़ी चिंता

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हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों व पेंशनरों को इस मर्तबा होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में लम्बित महंगाई भत्ते, उसके एरियर व छटे वेतन आयोग की सिफारिशों के निर्धारण के एरियर मिलने की पूर्ण आस थी, लेकिन 16वे वित्त आयोग की सिफारिशों में 1950 से मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बन्द करने की वजह से प्रदेश सरकार सहित कर्मचारियों को मायूसी का सामना करना पड़ा है।
अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ के इलेक्टेड राज्य उपाध्यक्ष एल डी चौहान ने कहा कि कर्मचारियो के डीए व एरियर के मुद्दे पर हर सम्भव प्रयास किया जाएगा, जिस तरह माननीय विधायक जनता द्वारा चुनकर आते है और उनकी जनता की मांगों के प्रति जवाबदेही निश्चित होती है उसी तरह कर्मचारी नेता भी कर्मचारियो द्वारा चुने जाते है और कर्मचारियों की मांगों के प्रति उनकी भी जवाब देही सुनिश्चित हो जाती है। चौहान ने कहा कि RDG बन्द हो जाने पर प्रदेश में आर्थिक संकट की सुगबुगाहट को देखते हुए महासंघ ने पत्र के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री से RDG की तरह कोई स्पेशल ग्रांट हिमाचल प्रदेश के लिए जारी करने की गुहार लगाई है ताकि कर्मचारियों की लम्बित देनदारियां निबट सके तथा प्रदेश में अन्य विकास के कार्यों को भी गति मिल सके। चौहान ने कहा कि मांगपत्र को ईमेल व रजिस्टर्ड पत्र के माध्यम से प्रेक्षित किया गया है, जो कि इस आर्थिक संकट में कर्मचारी सँगठन का एक नैतिक कर्तव्य बनता था और प्रदेश के कर्मचारियों को पूर्ण उम्मीद है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के हित मे विशेष वितीय अनुदान जारी करके कृतार्थ करेगी। चौहान ने कहा कि सभी संगठनों को विशेष अनुदान की मांग अपने-अपने तरीके से केंद्र तक पहुंचाने की मुहिम पर काम करना चाहिए।


