शिक्षा

रामपुर कॉलेज से पत्रकारिता विषय समाप्त, जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़!

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रामपुर बुशहर।

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जी.बी. पंत राजकीय महाविद्यालय, रामपुर से पत्रकारिता एवं जनसंचार (जेएमसी) विषय को बंद किए जाने के निर्णय ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह निर्णय न केवल छात्र हितों की अनदेखी है, बल्कि जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य पर सीधा प्रहार है।

रामपुर महाविद्यालय वर्षों से किन्नौर, आनी, निरमंड, कुमारसैन तथा ऊपरी शिमला के विद्यार्थियों के लिए पत्रकारिता शिक्षा का एकमात्र प्रमुख सरकारी केंद्र रहा है। इन क्षेत्रों के अन्य सरकारी महाविद्यालयों में यह विषय उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इसे बंद करने से सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण विकल्प समाप्त हो गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजकीय महाविद्यालय रोहड़ू में पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय को पुनः अधिसूचित कर प्रथम वर्ष में प्रवेश दोबारा शुरू किए जा सकते हैं, तो रामपुर महाविद्यालय को इस सुविधा से आखिर क्यों वंचित रखा गया है? इस दोहरे रवैये को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में गहरी नाराज़गी है। उनका कहना है कि एक ही उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले महाविद्यालयों के साथ अलग-अलग नीति अपनाना समझ से परे है।

 

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हैरानी की बात यह भी है कि रामपुर महाविद्यालय में अभी पत्रकारिता एवं जनसंचार के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा विषय के लिए नियमित सहायक प्राध्यापक भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद प्रथम वर्ष में प्रवेश बंद कर देना विभागीय योजना और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के डिजिटल और सूचना-प्रधान युग में पत्रकारिता एवं जनसंचार सबसे अधिक रोजगारोन्मुख विषयों में से एक है। यह विषय मीडिया, डिजिटल पत्रकारिता, जनसंपर्क, विज्ञापन, कंटेंट क्रिएशन, कॉर्पोरेट संचार और सरकारी सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करता है। ऐसे समय में इस विषय को समाप्त करना युवाओं की संभावनाओं को सीमित करने वाला निर्णय माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने प्रदेश सरकार तथा उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि रामपुर महाविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए तथा प्रथम वर्ष में प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए। उनका कहना है कि यदि इस निर्णय पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया गया तो क्षेत्र के विद्यार्थी, अभिभावक, पूर्व छात्र और सामाजिक संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करने को विवश होंगे।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनजातीय और दूरदराज़ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शिक्षा से वंचित करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है और सरकार को इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए।

Deepika Sharma

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