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EXCLUSIVE: गुपचुप बिक रही ‘गर्भपात दवा “’, MRP मिटाकर वसूली!

हिमाचल में दवा माफिया पर उठे सवाल

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“बिना पर्चे बिक रही गर्भपात की दवा

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महिलाओं की जान से हो सकता है खिलवाड़”

 

शिमला।

हिमाचल प्रदेश में गर्भपात के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। शिमला में सामने आए एक मामले ने कुछ दवा विक्रेताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक केमिस्ट ने बिना किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) के प्रिस्क्रिप्शन के मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल युक्त गर्भपात की दवा एक महिला को बेच दी। इतना ही नहीं, महिला के अनुसार दवा के पैक पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) को मिटाकर उससे 1800 रुपये वसूले गए, जबकि सामान्य तौर पर इस दवा की कीमत इससे काफी कम होती है।
महिला की पहचान गोपनीय रखते हुए उसने बताया कि उससे किसी प्रकार का वैध चिकित्सकीय पर्चा नहीं मांगा गया।

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यह मामला न केवल दवा नियमों के उल्लंघन का संकेत देता है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही का भी उदाहरण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल का उपयोग केवल पंजीकृत चिकित्सक, विशेष रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए। गर्भ की अवधि जाने बिना या डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं का सेवन करने से अत्यधिक रक्तस्राव, अधूरा गर्भपात, गंभीर संक्रमण, आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता और कुछ मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा प्रिस्क्रिप्शन आधारित (Schedule H) श्रेणी की है और इसे बिना वैध पर्चे के बेचना नियमों का उल्लंघन है। यदि कहीं भी बिना डॉक्टर के पर्चे के यह दवा बेची जा रही है या अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो यह जांच और कार्रवाई का विषय है।
स्वास्थ्य और औषधि प्रशासन से मांग की जा रही है कि ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर दोषी मेडिकल स्टोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ रोका जा सके।और महिलाओं को भी इसे लेकर जागरूक किया जाए की ये दवा अपने आप इस्तेमाल करना जान का खतरा खड़ा कर सकती है 

नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप संबंधित महिला के दावे पर आधारित हैं। संबंधित विभाग की जांच के बाद ही अंतिम तथ्य स्पष्ट होंगे।

Deepika Sharma

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