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असर विशेष: डिजिटल दौर में भी जिंदा है पत्रों का अपनापन, इंदौर से आकाशवाणी शिमला पहुंचा अनोखा पोस्टकार्ड

'वर्ड ऑफ द डे', समसामयिक घटनाओं और शुभकामनाओं से भरा हस्तलिखित पोस्टकार्ड बना चर्चा का विषय

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शिमला।

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मोबाइल फोन, ई-मेल और सोशल मीडिया के दौर में जहां हाथ से लिखे पत्र लगभग इतिहास बनते जा रहे हैं, वहीं आकाशवाणी शिमला को इंदौर (मध्य प्रदेश) से प्राप्त एक हस्तलिखित पोस्टकार्ड ने पुराने दौर की आत्मीयता और संवाद की संस्कृति को फिर से जीवंत कर दिया है।
यह पोस्टकार्ड इंदौर निवासी प्रो. (विश्वनाथ) द्वारा आकाशवाणी शिमला के समाचार कक्ष को भेजा गया है। पोस्टकार्ड में केवल शुभकामनाएं ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया की समसामयिक घटनाओं, “वर्ड ऑफ द डे”, पर्यावरण, राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों और सकारात्मक संदेशों को भी बेहद रोचक अंदाज में लिखा गया है।
पत्र में “Nationally Determined Contributions (NDCs)” का उल्लेख करते हुए जलवायु परिवर्तन और भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों पर जानकारी साझा की गई है। साथ ही टाइम मैगज़ीन की “100 Next India Leaders” सूची का भी जिक्र किया गया है। दूसरे हिस्से में अंतरराष्ट्रीय समानता दिवस, राजनीतिक घटनाक्रम, शिक्षा, साहित्य, खेल, फिल्मों और विभिन्न समसामयिक विषयों से जुड़े संक्षिप्त नोट्स भी लिखे गए हैं। पत्र के अंत में लेखक ने आकाशवाणी शिमला के लिए शुभकामनाएं भी प्रेषित की हैं।
आकाशवाणी शिमला के लिए यह पोस्टकार्ड इसलिए भी विशेष है क्योंकि आज के डिजिटल युग में डाक के माध्यम से भेजे जाने वाले हस्तलिखित पत्र लगातार कम होते जा रहे हैं। ऐसे समय में किसी श्रोता का अपने हाथों से लिखकर विचार, जानकारी और शुभकामनाएं भेजना न केवल आकाशवाणी के प्रति उसके जुड़ाव को दर्शाता है, बल्कि भारतीय डाक व्यवस्था और पत्र लेखन की उस परंपरा को भी जीवित रखता है, जिसने दशकों तक लोगों के दिलों को जोड़े रखा।
यह पोस्टकार्ड इस बात का भी संदेश देता है कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, लेकिन हाथ से लिखे शब्दों की आत्मीयता, संवेदनाएं और अपनापन कभी कम नहीं हो सकते। आकाशवाणी शिमला के लिए यह पत्र केवल एक डाक नहीं, बल्कि श्रोताओं के अटूट विश्वास, स्नेह और संवाद का सुंदर प्रतीक बन गया है।

Deepika Sharma

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