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कलम की ताकत से राष्ट्रीय पहचान तक : एएचएसबी के तनिष शर्मा की प्रेरक यात्रा

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कलम की ताकत से राष्ट्रीय पहचान तक : एएचएसबी के तनिष शर्मा की प्रेरक यात्रा

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शिमला, 01 जुलाई, 2026 : यह साबित करते हुए कि सार्थक पत्रकारिता उम्र की मोहताज नहीं होती, ऑकलैंड हाउस स्कूल फॉर बॉयज़ के कक्षा नौ के छात्र तनिष शर्मा ने सेंटर फॉर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म (सीआईजे), नई दिल्ली द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म नेटवर्क (जीआईजेएन) के सहयोग से आयोजित प्रथम आमंत्रणीय इंडिया इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म प्रतियोगिता के फाइनल में ‘8वें सर्वश्रेष्ठ पत्रकार’ का राष्ट्रीय स्थान हासिल किया है।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इस प्रतियोगिता में देशभर से 25 हजार से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें अनुभवी और पेशेवर पत्रकार भी शामिल थे, ने हिस्सा लिया था। ऐसे कड़े मुकाबले में तनिष का देश के शीर्ष प्रतिभागियों में स्थान बनाना उनकी प्रतिभा, मेहनत और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है।

तनिष का पुरस्कार विजेता खोजी लेख भारतीय समाज में आज भी व्याप्त जाति-आधारित भेदभाव जैसे अत्यंत संवेदनशील विषय पर आधारित था। इस विषय पर कार्य करने के लिए उन्हें व्यापक फील्डवर्क करना पड़ा, अनेक लोगों से बातचीत करनी पड़ी और तथ्यों का गंभीरता से संकलन करना पड़ा। उनका मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें खोजी पत्रकारिता की वास्तविक चुनौतियों से परिचित कराया, जहाँ लोगों का विश्वास जीतना और तथ्यों को निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनके अनुसार यह अनुभव उनके अब तक के लेखन जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सीखने वाला अवसर रहा।

शिमला ज़िले के रोहड़ू से संबंध रखने वाले तनिष कम उम्र में ही एक उभरते हुए लेखक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। वे तीन स्व-प्रकाशित पुस्तकों—द ट्रैप्ड सोल, द स्टूपिड एंड द एनॉयड तथा एवरीडे फ़साड—के लेखक हैं। इनमें एवरीडे फ़साड उनके दैनिक जीवन के अनुभवों और सामाजिक अवलोकनों पर आधारित निबंधों का संग्रह है। लेखन के अलावा तनिष शिमला के विभिन्न कैफ़े में आयोजित ओपन माइक कॉमेडी शो में भी प्रस्तुति दे चुके हैं, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता और जनसंपर्क कौशल का परिचय मिलता है।

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तनिष अपनी पत्रकारिता की प्रेरणा वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार से लेते हैं। उनका कहना है कि आम लोगों के मुद्दों को केंद्र में रखकर पत्रकारिता करने की रवीश कुमार की शैली ने उनके सोचने का दृष्टिकोण विकसित किया। वे बताते हैं कि एनडीटीवी से रवीश कुमार का जाना उनके लिए बेहद भावुक और झकझोर देने वाला क्षण था। इसके अलावा राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव के विचारों और जमीनी मुद्दों के प्रति उनके दृष्टिकोण ने भी तनिष को गहराई से प्रभावित किया है।

भविष्य की योजनाओं के बारे में तनिष बताते हैं कि वे स्नातक स्तर पर विधि (लॉ) की पढ़ाई करना चाहते हैं और इसके बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य रखते हैं। उनका मानना है कि कानून की शिक्षा उन्हें संविधान, शासन व्यवस्था और सार्वजनिक नीति की बेहतर समझ प्रदान करेगी, जो उन्हें समाज की अधिक प्रभावी सेवा करने में सहायक होगी।

हालाँकि उनका अंतिम लक्ष्य प्रशासनिक सेवा है, लेकिन वे पत्रकारिता और लेखन को कभी नहीं छोड़ना चाहते। उनकी इच्छा है कि वे भविष्य में एक नियमित समाचार-पत्र स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) के रूप में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर लिखते रहें।

तनिष कहते हैं, “एक पत्रकार का काम अपने ज्ञान का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि जटिल विषयों को आम लोगों के लिए सरल बनाना है, ताकि वे सही जानकारी के आधार पर बेहतर निर्णय ले सकें। जब पत्रकारिता लोगों को जागरूक बनाती है, तभी वह समाज के लिए सार्थक योगदान देती है।”

तनिष के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस विश्वास की पुष्टि है कि पत्रकारिता समाज में सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रभावशाली माध्यम है। विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ साहित्य, खोजी पत्रकारिता और सार्वजनिक मंचों पर अभिव्यक्ति के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि वे कम उम्र में ही बौद्धिक जिज्ञासा, सामाजिक प्रतिबद्धता और जनहित के प्रति समर्पण की एक सशक्त मिसाल बनकर उभर रहे हैं।

Deepika Sharma

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