शिमला विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग दिवस: कस्टम्स के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ओम प्रकाश शर्मा बोले— ड्रग्स देश को बर्बाद करने की साज़िश, नशा करवाने वाला दोस्त नहीं अपराधी है

शिमला, अगस्त 14
शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) के कानून विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष डॉ. भावना शर्मा की अध्यक्षता में वीरवार को ‘राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग दिवस’ के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग, भारत सरकार) के केंद्रीय एक्साइज, कस्टम्स एवं सर्विस टैक्स के वरिष्ठ अधीक्षक ओम प्रकाश शर्मा ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम की शुरुआत में शिमला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. आर.एल. शर्मा, डीन फैकल्टी प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा ने मुख्य अतिथि ओम प्रकाश शर्मा का हिमाचल की पारंपरिक हिमाचल टोपी व शॉल भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व प्राध्यापक मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से डीन एकेडमिक्स: प्रो. डॉ. आनंद मोहन शर्मा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. नीलम शर्मा और विभिन्न अध्ययन संकायों के विभागाध्यक्ष, विद्यार्थी, शिक्षकगण उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ओम प्रकाश शर्मा ने एंटी-रैगिंग से जुड़े कानूनी प्रावधानों, नियमों और इसके गंभीर दुष्प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एक भयमुक्त और सौहार्दपूर्ण माहौल का होना बेहद ज़रूरी है, ताकि नए छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी प्रतिभा का विकास कर सकें। एंटी-रैगिंग के साथ-साथ मुख्य वक्ता ने देश में तेज़ी से फैल रहे ‘ड्रग एब्यूज’ यानि नशीले पदार्थों के सेवन के मुद्दे पर विस्तृत और चिंताजनक आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान में करीब 25 करोड़ लोग नशे की चपेट में हैं। शर्मा ने कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। उन्होंने आगाह किया कि विरोधी ताकतें भारत की इस युवा शक्ति और अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए जानबूझकर देश में ड्रग्स की तस्करी करवा रही हैं। ड्रग एब्यूज से उत्पन्न मानसिक व सामाजिक आघात आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है, जिससे युवाओं और समाज को बचाना बेहद आवश्यक है।
शर्मा ने उन नारको-ड्रग उत्पादक देशों के खतरनाक जाल को उजागर किया, जिनकी पूरी अर्थव्यवस्था ही ड्रग्स के अवैध कारोबार पर टिकी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उपभोक्ता देशों में ड्रग्स की मांग रहेगी, तब तक ये देश सप्लाई करते रहेंगे। इसलिए हमें सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए सबसे पहले नशे की मांग को शून्य करना होगा। ओम प्रकाश शर्मा ने नशे की लत के कारणों और इसके शुरुआती रोकथाम के उपायों पर भी प्रकाश डाला कि नशा बढ़ने के साथ-साथ समाज में गंभीर सामाजिक तनाव, आर्थिक बदहाली और अपराध में बढ़ोतरी होती है। विद्यार्थियों को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति आपको किसी भी रूप में नशे के लिए प्रेरित करता है, वह आपका दोस्त या शुभचिंतक नहीं, बल्कि अपराधी है। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज ऐसे असामाजिक तत्वों को संरक्षण या मूक समर्थन देता है, तब-तब आतंकवाद और ड्रग्स माफिया को बल मिलता है। विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से नशे को समाज, प्रदेश और देश से जड़ से उखाड़ फेंकने का संदेश। प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि ओम प्रकाश शर्मा ने प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को नशा-मुक्त भारत के निर्माण के लिए एक स्वर में संकल्प दिलाया कि हम संकल्प लेते हैं कि— न हम स्वयं कभी नशा करेंगे, और ना ही अपने परिवार, मित्र या समाज में किसी को नशा करने देंगे।
कानून विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. भावना शर्मा, डीन फैकल्टी प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. आनंद मोहन शर्मा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. नीलम शर्मा और कुलसचिव प्रो. आर.एल. शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों व प्रतिभागी विद्यार्थियों का कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद व्यक्त किया और नशे की बुराई से दूर रहने का संदेश दिया।



