हिमाचल के रेशम कृषकों ने रचा इतिहास, खुले नीलामी बाजार में मिला ₹1960 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड मूल्य
मुख्यमंत्री के "हिम सिल्क मिशन" विजन को मिली बड़ी सफलता : उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान

शिमला, 08 जून 2026
हिमाचल प्रदेश के रेशम (सेरीकल्चर) क्षेत्र के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है। प्रदेश के कोया उत्पादक किसानों को खुले नीलामी बाजार में उनकी उपज का ₹1960 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ है, जो राज्य के सेरीकल्चर इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मूल्य माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने न केवल प्रदेश के रेशम कृषकों की मेहनत को नई पहचान दी है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा सेरीकल्चर क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सफलता को भी प्रमाणित किया है।

माननीय मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रदेश के सभी रेशम कृषकों, विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। रेशम उत्पादन एक ऐसा क्षेत्र है जो सीमांत एवं छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट में प्रदेश के रेशम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए “हिम सिल्क मिशन” की घोषणा की गई है, जिसके लिए ₹2 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश में रेशम उत्पादन, गुणवत्तायुक्त कोया उत्पादन, शहतूत रोपण विस्तार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार, महिला एवं युवा सहभागिता तथा विपणन सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्राप्त रिकॉर्ड मूल्य इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं और आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश का रेशम क्षेत्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
उद्योग मंत्री श्री हर्षवर्धन चौहान ने इस उपलब्धि को प्रदेश के रेशम कृषकों के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तायुक्त कीट बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, रोग प्रबंधन तथा विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप कोया गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित खुले एवं पारदर्शी कोया नीलामी बाजारों ने किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज प्राप्त ₹1960 प्रति किलोग्राम का मूल्य न केवल हिमाचल प्रदेश के लिए एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह देशभर के रेशम उत्पादक राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
श्री चौहान ने कहा कि “हिम सिल्क मिशन” के माध्यम से प्रदेश में रेशम क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। मिशन के अंतर्गत उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा ताकि किसानों को उनकी मेहनत का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को उच्च गुणवत्ता वाले बाइवोल्टाइन रेशम उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने आगे कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की अथक मेहनत, विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों तथा मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रत्यक्ष परिणाम है। रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त होने से प्रदेश के हजारों रेशम कृषकों में नया उत्साह पैदा होगा और अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी गतिविधि से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
अंत में मुख्यमंत्री एवं उद्योग मंत्री ने प्रदेश के सभी रेशम कृषकों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि “हिम सिल्क मिशन” के माध्यम से हिमाचल प्रदेश का सेरीकल्चर क्षेत्र आने वाले वर्षों में ग्रामीण समृद्धि, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।




