राम नाम की भक्ति में सराबोर हुआ राम शरणम् शिमला, संत श्री अश्विनी बेदी का प्रकटोत्सव श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया

शिमला, 26 जुलाई।
श्री राम शरणम् के संस्थापक संत श्री अश्विनी बेदी का प्रकटोत्सव रविवार को राम शरणम्, शिमला में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर अमृतवाणी एवं भक्ति प्रकाश का सामूहिक पाठ किया। पूरे परिसर में “राम-राम” की मधुर ध्वनि गूंजती रही और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालु राम नाम का जाप करते हुए गुरुजी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा, आस्था और कृतज्ञता व्यक्त करते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान सभी साधकों ने संकल्प लिया कि वे राम नाम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएंगे तथा सत्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलते हुए गुरुजनों के बताए आदर्शों का अनुसरण करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संत का प्रकटोत्सव तभी सार्थक होता है, जब उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को समझकर उन्हें अपने जीवन में उतारा जाए। इस अवसर पर संत श्री अश्विनी बेदी के जीवन पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि उनका जन्म 26 जुलाई 1961 को पंजाब के लुधियाना में संत नरकेवल बेदी के परिवार में हुआ। बचपन से ही उनमें ईश्वर के प्रति गहरी श्रद्धा और सेवा का भाव था। स्वामी सत्यानंद महाराज तथा प्रेम जी महाराज के आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राम नाम के प्रचार-प्रसार और मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि संत श्री अश्विनी बेदी वर्षों से श्री राम शरणम्, लुधियाना के माध्यम से भक्ति, सेवा और साधना का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। उनके प्रयासों से देशभर में हजारों श्रद्धालु राम नाम की साधना से जुड़े हैं। उन्होंने राम नाम के जाप, सच्चे गुरु की भक्ति, विनम्रता, करुणा, परोपकार और सेवा को मोक्ष का मार्ग बताते हुए समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया है। संत श्री अश्विनी बेदी केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि समाजसेवी भी हैं। वे नशा मुक्ति, शिक्षा, सेवा और सामाजिक एकता जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके जीवन और विचार आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं तथा समाज को नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर करने का कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने कहा कि संत श्री अश्विनी बेदी का जीवन इन पंक्तियों को सार्थक करता है— “सच्चे संत की शरण में बैठ मिले विश्राम, मन मांगा फल तब मिले, जपे राम का नाम।” कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं आध्यात्मिक जागृति की कामना करते हुए राम नाम संकीर्तन में भाग लिया। —
जसवीर सूद (डिम्पल)




