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OPS vs NPS वेतन विसंगति बढ़ी 29% तक, कर्मचारियों में नाराज़गी तेज

लंबित वित्तीय मामलों पर एक जुट हो समस्त कर्मचारी संगठन :- सुरेन्द्र पुंडीर

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हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के राज्य चेयरमैन एवं नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ के जिला सिरमौर अध्यक्ष सुरेन्द्र पुंडीर ने प्रदेश के सभी कर्मचारी संगठनों से कर्मचारियों के वर्षों से लंबित वित्तीय मामलों पर एक जुट हो कर वार्ता अथवा संघर्ष की रणनीती बनाने की अपील की हे। सुरेन्द्र पुंडीर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के बाद कर्मचारियों ने सरकार के प्रति भरपूर आभार व्यक्त किया साथ ही माननीय मुख्यमंत्री के निवेदन पर सरकार की वित्तीय स्थिति नियंत्रण में लाने तक धैर्य भी रखा परंतु अब बढ़ती महंगाई तथा इन पी इस एवं ओ पी एस कर्मचारियों के मध्य उत्पन्न हुई लगभग 27% की वेतन की विसंगति की खाई (जो अब बढ़ कर 29% हो जाएगी) ने कर्मचारियों को चिंतन हेतु विवश कर दिया हे जहां एन पी इस कर्मचारियों को 14% एनएसडीएल में शेयर के रूप में तथा केंद्र के बराबर अतिरिक्त महंगाई भत्ता दिया जा रहा है वहीं प्रदेश के पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के वेतन से यद्यपि सरकार को 14% शेयर न देकर सीधी बचत हो रही है वहीं उन्हें 15% महंगाई भत्ता भी कम दिया जा रहा है परिणामस्वरूप प्रत्येक कर्मचारी को 5000 रूपये से लेकर 20000 रूपये प्रतिमाह तक का कम वेतन मिल रहा हे जिसके कारण पुरानी पेंशन बहाली हेतु संघर्ष करने वाले संगठन पर कर्मचारियों तथा पेंशन भोगी कर्मचारियों का दबाव बढ़ता जा रहा हे। सुरेन्द्र पुंडीर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात में कुछ कर्मचारी प्रतिनिधि कर्मचारियों से महंगाई भत्ते तथा अन्य लंबित वित्तीय लाभों के लिय न्यायालय में केस दायर करने के लिए 400 रूपये से लेकर हजारों रुपए एकत्र कर इस मामले में न्यायायिक समाधान का प्रयास कर रहे हे परंतु यह कटु सत्य हैं कि कर्मचारियों के हजारों मामले पहले ही वर्षों से माननीय न्यायालय में विचाराधीन हे तथा ऐसे भी हजारों मामले हे जिनका निर्णय होने यहां तक कि अवमानना याचिका दायर होने के वावजूद भी विभिन्न विभागों द्वारा उन्हें लागू नहीं किया गया हे । एसी परिस्थिति में बेशक न्यायिक हस्तक्षेप एक वैकल्पिक समाधान हो सकता हे परंतु इसका निर्णय कब ओर कैसे होगा इस बात की प्रतिक्षा में ही दशकों लग जायेंगे। यह भी चिंता का विषय हे कि सरकार के लगभग साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के वावजूद आज तक न तो किसी अराजपत्रित कर्मचारी संगठन को मान्यता मिल पाई है तथा न ही जे सी सी को बैठक आयोजित हो पाई हे अन्यथा शायद कुछ मुद्दोंपर सरकार से सकारात्मक वार्ता हो सकता थी। यद्यपि प्रदेश में एक जनवरी 2026 से आठवें वेतन आयोग के लागू होने की आशा थी वही अभी तक जहां सातवें वेतन आयोग के संशोधित वेतनमान का एरियर लंबित है वही वेतन के साथ मिलने वाले भत्ते 2006 से ही नहीं बढ़े हे। पुंडीर ने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वह दलगत विचारधारा एवं निजी स्वार्थों को तिलांजलि देकर अपने उत्तरदायित्व का निर्भीकता एवं निष्पक्षता से निर्वहन करने हेतु आगे आए अन्यथा हिमाचल प्रदेश में स्थापित कर्मचारी संगठनों का प्रभाव एवं वजूद ही समाप्त हो जाएगा।साथ ही सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाली हेतु 2022 से पूर्व किए गए संयुक्त ऐतिहासिक आंदोलन की याद दिलाते हुए आह्वान किया कि वह सभी अपने पद तथा विभाग की सीमाओं को लांघ कर एक जुट हो कर अपने अपने संगठनों के प्रतिनिधियों पर लंबित वित्तिय लाभों की अदायगी के लिय एक सशक्त मंच तैयार करने तथा एक व्यवहारिक रणनीति बनाने का दबाव बनाए तथा स्वयं भी संघर्ष के लिय तैयार रहे। पुंडीर ने आशा व्यक्त की कि संगठनों के संयुक्त प्रयास कर्मचारियों के विभिन्न मुद्दों पर सरकार से वार्ता करने अथवा अन्य वैकल्पिक समाधान का माहौल तैयार करने में सफल होंगे।

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Deepika Sharma

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