Asar EXCLUSIVE: निदेशालय में तैनात, वेतन स्कूलों से—शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
डेपुटेशन पर रोक के बावजूद प्रधानाचार्य कार्यालयों में, सरकार की नीति पर सवाल

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरकार द्वारा बार-बार शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार, कई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निदेशालय और उपनिदेशक कार्यालयों में तैनात किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनका वेतन अब भी संबंधित विद्यालयों से ही निकाला जा रहा है। इससे न केवल स्कूलों में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि सरकार की नीतियों की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
कुछ शिक्षक सगठनों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि स्कूलों में नेतृत्व की कमी हो जाती है। वहीं, सरकार द्वारा “व्यवस्था परिवर्तन” के दावे भी केवल कागजी ही नजर आ रहे हैं।
शिक्षा विभाग के इस दोहरे रवैये को लेकर शिक्षकों और आम जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या वाकई जमीनी स्तर पर सुधार देखने को मिलेगा या नहीं।




