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श्रमिकों के सपनों को मिल रही नई उड़ान, कामगार कल्याण बोर्ड कैसे बना बड़ा सहारा

सुनिए मुनीश की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी

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श्रमिकों के बच्चों के विवाह पर मिल रही 51 हजार रुपये की वित्तीय सहायता

98 लाभार्थियों को दी 50 लाख 84 हजार रुपये की वित्तीय सहायता

हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं की वजह से श्रमिकों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है। जिला शिमला के धामी क्षेत्र के रहने वाली मुनीश शर्मा के विवाह के लिए बोर्ड की ओर से 51 हजार रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

मुनीश शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि बोर्ड की ओर से दी गई वित्तीय सहायता से काफी हद तक शादी के लिए पड़ने वाले बोझ से राहत मिली है। मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का विशेष आभार करता हूं जिनकी वजह से श्रमिकों के बच्चों को वित्तीय सहयोग विभिन्न योजना के माध्यम से मिल रहा है।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि बोर्ड के माध्यम से अनेकों योजनाएं चल रही है सभी पात्र श्रमिकों से अपील करता है कि वह समय पर अपना पंजीकरण करवाएं और सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं। यह प्रयास न केवल श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि प्रदेश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
श्रम कल्याण अधिकारी शिमला जोन श्रेय शर्मा ने बताया कि शिमला जोन में 98 लाभार्थियों को अभी तक 50 लाख 84 हजार रुपए की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। बोर्ड के माध्यम से श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के लिए अनेकों योजनाएं लागू है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिक वर्ग को काफी लाभ मिल रहा है।
श्रमिकों के उत्थान के लिए कार्य कर रहा बोर्ड

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कामगार कल्याण बोर्ड 
हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड का गठन 2 मार्च 2009 को के प्रावधानों के तहत किया गया था। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। बोर्ड द्वारा श्रमिकों के हित में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेंशन, मातृत्व सहायता, उपकरण सहायता तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों के अंतर्गत वह सभी कार्य शामिल किए गए हैं जो भवन निर्माण, सड़कों, मार्गों, सिंचाई, जल निकासी, तटबंध, बाढ़ नियंत्रण, विद्युत उत्पादन एवं वितरण, टेलीफोन और संचार माध्यमों, बांधों, नहरों, सुरंगों, पुल-पुलियों, पाइपलाइन तथा टावरों के निर्माण, मरम्मत और रख-रखाव से संबंधित हैं। ऐसे सभी कार्यों में संलग्न श्रमिक बोर्ड में पंजीकरण करवाकर योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। हालांकि, वह कार्य जिन पर या लागू होते हैं, इस बोर्ड के दायरे में नहीं आते।

पंजीकरण की प्रक्रिया सुलभ
पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया गया है। इसके तहत 18 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के वह श्रमिक पात्र हैं, जिन्होंने पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिन सन्निर्माण कार्य में कार्य किया हो। पंजीकरण के लिए श्रमिकों को संबंधित जिला श्रम कल्याण अधिकारी के कार्यालय में आवेदन करना होता है। आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड या परिवार रजिस्टर की प्रति तथा दो पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। आयु प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, श्रमिक ऑनलाइन माध्यम से भी अपना पंजीकरण और नवीनीकरण कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक हो गई है। यह पहल डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।

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Deepika Sharma

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